कतर के रस लफ्फन इंडस्ट्रियल सिटी में रविवार रात एक बहुत बड़ा हादसा हुआ है। यहाँ की बरज़न गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुए जोरदार विस्फोट में 13 लोगों की जान चली गई। मरने वालों में 12 भारतीय नागरिक शामिल हैं, जिससे प्रवासी समुदाय में गहरा दुख और चिंता का माहौल है।
यह हादसा 21 जून 2026 की रात को हुआ जब फैक्ट्री में कामकाज दोबारा शुरू किया जा रहा था। इस धमाके में 12 भारतीयों के अलावा एक पाकिस्तानी नागरिक की भी मौत हुई है। हादसे में अलग-अलग देशों के 66 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कतरी, भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, केन्याई, घाना, तंज़ानिया, नाइजीरिया और नेपाल के लोग शामिल हैं। खबर है कि सभी घायल लोगों की हालत अब स्थिर है और उनका इलाज चल रहा है।
सरकारी बयान और जाँच
कतर के ऊर्जा मंत्री Saad al-Kaabi ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने साफ़ किया कि यह एक दुर्घटना थी और इसका मकसद किसी तरह की तोड़-फोड़ या हमला नहीं था। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं जताईं और दोहा में भारतीय और पाकिस्तानी दूतावासों का दौरा भी किया।
कतर के गृह मंत्रालय ने बताया कि यह धमाका ऑपरेशन के दौरान हुई किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ। वहीं QatarEnergy ने कन्फर्म किया कि घटना तब हुई जब प्लांट में काम शुरू किया जा रहा था। फिलहाल पूरी घटना की बारीकी से जाँच की जा रही है ताकि सही वजह का पता लगाया जा सके।
भारत सरकार और राज्य सरकार की मदद
दोहा में भारतीय दूतावास ने 12 भारतीयों की मौत की पुष्टि कर दी है। दूतावास के अधिकारी कतर सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि प्रभावित परिवारों को मदद मिल सके और शवों को जल्द से जल्द भारत लाया जा सके। भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक जताया है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने घोषणा की है कि तमिलनाडु के मृतक परिवारों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं।
कामकाज और प्रभाव
बताया गया है कि मार्च में हुए एक ईरानी हमले के बाद यह प्लांट बंद था और अब जब इसे दोबारा चालू किया जा रहा था, तब यह विस्फोट हुआ। हालांकि, इस हादसे के बावजूद कतर के LNG निर्यात, रस लफ्फन पोर्ट और अन्य लॉजिस्टिक्स पर कोई असर नहीं पड़ा है। पर्यावरण को भी कोई खतरा नहीं मिला है। यह बरज़न फैसिलिटी दुनिया के LNG निर्यात में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है, जिसने 2025 में दुनिया की करीब 19% सप्लाई की थी।
