पाकिस्तान और ईरान के बीच हुई बातचीत के बाद कतर का एक गैस टैंकर आखिरकार पाकिस्तान के लिए रवाना हो गया है. यह जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते गया है. फरवरी में शुरू हुए झगड़ों के बाद पहली बार कतर की गैस इस रास्ते से बाहर निकली है.

कतर के गैस टैंकर ‘Al Kharaitiyat’ का क्या अपडेट है?

‘Al Kharaitiyat’ नाम का यह टैंकर मई की शुरुआत में कतर के रास लफ़ान (Ras Laffan) प्लांट से निकला था. 9 या 10 मई को इसे ओमान की खाड़ी में देखा गया. यह जहाज ईरानी तट के पास से होते हुए आगे बढ़ा. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सब पाकिस्तान और ईरान के बीच हुई बातचीत का नतीजा है. इस जहाज को कतरी कंपनी ‘नाकलत’ (Nakilat) चलाती है.

ईरान ने रास्ता क्यों दिया और इसका क्या असर होगा?

बताया जा रहा है कि ईरान ने कतर और पाकिस्तान के साथ भरोसा बढ़ाने के लिए इस जहाज को जाने दिया. पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ (mediator) का काम कर रहा है. पाकिस्तान में गैस की भारी कमी थी, इसलिए उसने महंगे बाजार के बजाय मिडिल ईस्ट से सप्लाई लेने की कोशिश की. रिपोर्ट के अनुसार, एक और टैंकर ‘Mehazem’ भी जल्द ही इस रास्ते से गुजर सकता है.

क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा की क्या स्थिति है?

हालांकि एक जहाज निकल गया, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण हैं. ईरानी हमलों की वजह से कतर की 17% गैस एक्सपोर्ट क्षमता प्रभावित हुई है. अमेरिका की सेंटकॉम (CENTCOM) ने बताया है कि ईरान की नाकाबंदी को रोकने के लिए 20 से ज्यादा अमेरिकी युद्धपोत इलाके में तैनात हैं. पहले 6 अप्रैल को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दो कतरी गैस टैंकरों को रोका था.

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या कतर की सारी गैस अब पाकिस्तान जा पाएगी?

अभी सिर्फ ‘Al Kharaitiyat’ और ‘Mehazem’ जैसे कुछ जहाजों की बात हुई है. पहले इस रास्ते से रोज 3 जहाज जाते थे, लेकिन अब सप्लाई बहुत कम हो गई है.

इस मामले में अमेरिका की क्या भूमिका है?

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान मदद कर रहा है. वहीं, अमेरिकी नौसेना के 20 से ज्यादा जहाज इलाके में सुरक्षा और नाकाबंदी के लिए तैनात हैं.