कतर के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल कोई सीधी मध्यस्थता (Direct Mediation) नहीं कर रहा है। हालांकि, कतर ने यह भी कहा है कि वह इस क्षेत्र में चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए हो रही सभी कूटनीतिक कोशिशों का समर्थन करता है। मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने 24 मार्च 2026 को यह बयान जारी कर देश का रुख स्पष्ट किया। कतर का कहना है कि वे युद्ध को रोकने और हमलों को कम करने के लिए अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में बने हुए हैं।
कतर ने अमेरिका और ईरान विवाद पर क्या कहा?
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने बताया कि उनका देश दोनों देशों के बीच सीधे तौर पर कोई बातचीत नहीं करा रहा है। प्रवक्ता के अनुसार, कतर चाहता है कि युद्ध को कूटनीति के जरिए ही रोका जाए। कतर का मानना है कि चल रहे संघर्ष की वजह से खाड़ी देशों की सुरक्षा व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। कतर ने जोर देकर कहा कि ईरान और उसके पड़ोसियों के बीच तालमेल और सह-अस्तित्व जरूरी है। वे शांति बहाली के लिए सभी औपचारिक और अनौपचारिक रास्तों का समर्थन करते हैं।
मौजूदा हालात और अन्य देशों की भूमिका
क्षेत्र में शांति बहाली के लिए केवल कतर ही नहीं बल्कि अन्य देश भी कोशिशों में लगे हुए हैं। पिछले कुछ दिनों में इस मामले से जुड़े कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है:
| तारीख | प्रमुख घटनाक्रम |
|---|---|
| 24 मार्च 2026 | राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत और सहमति का दावा किया, जिसे तेहरान ने खारिज कर दिया। |
| 19 मार्च 2026 | ईरान ने कतर, कुवैत और यूएई की आलोचना की क्योंकि उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए हुआ। |
| 11 मार्च 2026 | कतर ने स्पष्ट किया कि हमलों के बीच वह मध्यस्थता की भूमिका नहीं निभा पाएगा। |
| अन्य मध्यस्थ | मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की भी तनाव कम करने के लिए कोशिशें कर रहे हैं। |
कतर का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। कतर ने स्पष्ट किया है कि भले ही वह सीधा मध्यस्थ न हो, लेकिन वह शांति के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास के साथ खड़ा है। खाड़ी में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह कूटनीतिक हलचल काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा से उनकी यात्रा और नौकरियों पर सीधा असर पड़ता है।
