हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर कतर और ओमान ने हाथ मिलाया है. दोनों देश इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि कैसे इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाया जाए ताकि व्यापार और जहाजों की आवाजाही में कोई रुकावट न आए. यह कदम क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है.

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जहाजों की सुरक्षा के लिए बड़े समझौते

17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MOU) हुआ, जिसमें कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई. इस समझौते का मकसद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में दुश्मनी और नाकाबंदी को खत्म करना था. इसके बाद 23 जून को ओमान और ईरान ने एक साझा बयान जारी कर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का भरोसा दिया.

ओमान ने IMO के साथ मिलकर दो अस्थायी और टोल-फ्री समुद्री रास्ते बनाए हैं ताकि फंसे हुए जहाज सुरक्षित बाहर निकल सकें. 24 जून को ओमान के सुल्तान हैथम और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन अल थानी के बीच मस्कट में बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य के प्रबंधन पर चर्चा की गई.

तनाव और चेतावनी

जहाँ एक तरफ GCC देशों ने बिना किसी शर्त के जहाजों की आवाजाही का समर्थन किया और टोल टैक्स का विरोध किया, वहीं ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने चेतावनी दी. ईरान ने कहा कि जहाजों को सिर्फ उन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करना चाहिए जिन्हें तेहरान ने मंजूर किया है. ईरान ने ओमान द्वारा बनाए गए अस्थायी रास्तों को खतरनाक बताया.

  • 27 जून: अमेरिकी नौसेना के JMIC ने ओमान के पास रास्तों को चौड़ा करने का ऐलान किया ताकि ज़्यादा ट्रैफिक निकल सके.
  • 28 जून: कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के एक क्रूड टैंकर पर हमला हुआ, जिससे स्थिति फिर तनावपूर्ण हो गई.
  • 29 जून: ओमान और ईरान के अधिकारियों ने ‘Joint Hormuz Committee’ की पहली बैठक की. ओमान के विदेश मंत्री ने साफ़ कहा कि वे कोई ट्रांजिट फीस नहीं लेंगे.

फिलहाल फ्रांस और ओमान इस समुद्री रास्ते से बारूदी सुरंगों (mines) को हटाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खींचतान ने इस पूरे मामले को काफी संवेदनशील बना दिया है.