कतर और पाकिस्तान ने 9 जुलाई 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू कराने की कोशिश की है। दोनों देशों का मकसद है कि इन दो देशों के बीच चल रही सैन्य कार्रवाई रुके और वे पुराने समझौते का पालन करें। यह कोशिश ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।
हाल ही में Strait of Hormuz में एक कमर्शियल जहाज पर ईरानी मिसाइल हमले के बाद तनाव बढ़ गया। इसके बाद दोनों तरफ से हमले और जवाबी हमले शुरू हो गए। अब मध्यस्थों की पहली प्राथमिकता यह है कि तकनीकी चर्चा शुरू करने से पहले अमेरिका और ईरान अपनी लड़ाई बंद करें।
इस पूरी कोशिश का मुख्य उद्देश्य जून 2026 में अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों के बीच हुए Islamabad Memorandum of Understanding (MoU) को फिर से लागू करना है। इस समझौते में विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए 60 दिन की समय सीमा तय की गई थी। इसमें एक हाई-लेवल कमेटी, अंतिम समझौते का रोडमैप और लेबनान के लिए एक डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, खबर है कि दक्षिण लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई इस समझौते को लागू करने में एक बड़ी रुकावट बनी हुई है।
कतरी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ माजिद अल अंसारी ने 1 जुलाई को बताया था कि बातचीत में सकारात्मक प्रगति हो रही है, लेकिन मौजूदा हालात अब काफी जटिल हैं। ईरान ने साफ कहा है कि वह Strait of Hormuz को तभी पूरी तरह खोलेगा जब लेबनान में युद्धविराम होगा और इजरायली सेना वहां से हट जाएगी। ईरान ने यह भी कहा कि जब तक लेबनान और उसकी जमी हुई संपत्तियों का मामला नहीं सुलझता, वह परमाणु बातचीत में शामिल नहीं होगा।
दूसरी ओर, अमेरिका का मानना है कि जो मुद्दे पहले ही सुलझ चुके हैं, उन्हें नए विवादों की वजह से उलझाया नहीं जाना चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई को इस समझौते (Islamabad MoU) को खत्म घोषित कर दिया। लेकिन पाकिस्तानी सरकार के सूत्रों ने 9 जुलाई को भरोसा जताया कि यह समझौता अभी भी बरकरार रहेगा।
