Qatar PM Statement: कतर पर ईरान के मिसाइल हमले जारी, प्रधानमंत्री ने इसे बताया बहुत बड़ी गद्दारी
कतर और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 8 मार्च 2026 को कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने ब्रिटिश नेटवर्क Sky News से बात करते हुए कहा कि कतर पर हो रहे ईरानी हमले एक बड़ी गद्दारी की तरह महसूस होते हैं। कतर ने हमेशा ईरान और दुनिया के बीच मध्यस्थता की है और एक अच्छे पड़ोसी की भूमिका निभाई है, इसलिए इन सीधे हमलों की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी।
ℹ: सऊदी अरब के Al-Jawf में ड्रोन हमला नाकाम, एयर डिफेंस ने आसमान में ही किया नष्ट।
हमलों से कतर में आम जिंदगी और एक्सपैट्स पर असर
इन हमलों का सीधा असर कतर में रहने वाले आम लोगों और वहां काम करने वाले भारतीय प्रवासियों पर पड़ रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस तनाव में अब तक 16 से 20 लोगों को मामूली चोटें आई हैं। हमलों का असर Hamad International Airport, Mesaieed और Ras Laffan के आस-पास के इंडस्ट्रियल इलाकों में देखा गया है। फिलहाल रमजान का महीना चल रहा है और इस दौरान हमलों से दैनिक जीवन काफी प्रभावित हो रहा है। प्रशासन ने लोगों की सुरक्षा के लिए अलर्ट जारी किए हैं और उन्हें हमलों के दौरान घरों के अंदर रहने की सलाह दी है।
कतर सरकार का एक्शन और सैन्य तैयारी
कतर की वायु रक्षा प्रणाली लगातार इन मिसाइल हमलों को नाकाम कर रही है। हाल ही की रिपोर्ट के अनुसार कतर ने 6 बैलिस्टिक मिसाइल और 2 क्रूज मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया है। कतर सरकार ने साफ किया है कि वे अपने पड़ोसियों के खिलाफ किसी भी तरह के युद्ध में शामिल नहीं होंगे। हालांकि अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और देश के लोगों की रक्षा करने का उन्हें पूरा अधिकार है। इस मामले को लेकर कतर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को अपनी चौथी आधिकारिक शिकायत भेज दी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कतर को मिल रहा समर्थन
ईरान के इन हमलों के बाद कतर को कूटनीतिक स्तर पर कई देशों का साथ मिल रहा है। कतर के विदेश राज्य मंत्री सुल्तान बिन साद अल मुरैखी ने कई देशों के नेताओं से बात कर हालात की जानकारी दी है।
- फ्रांस, कुवैत, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों ने कतर के समर्थन में आधिकारिक बयान जारी किया है।
- अरब लीग ने हमलों की निंदा के लिए एक आपातकालीन बैठक बुलाई और कतर का साथ दिया।
- कतर ने UN चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत अपनी आत्मरक्षा का अधिकार विश्व पटल पर रखा है।





