कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी में बुधवार और गुरुवार को हुई सिलसिलेवार घटनाओं ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है। बुधवार को कतर के बड़े ऊर्जा परिसर पर मिसाइल हमले हुए जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई और काफी संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसके ठीक बाद गुरुवार सुबह कतर के तट से कुछ ही दूरी पर एक व्यापारिक जहाज को भी निशाना बनाया गया है। कतर सरकार ने इन हमलों के पीछे ईरान का हाथ होने का दावा किया है और कड़े कूटनीतिक कदम उठाए हैं।

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कतर में हुए हमलों और मौजूदा स्थिति की बड़ी बातें

  • रास लफान हमला: बुधवार, 18 मार्च 2026 को रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल दाग़े गए जिससे वहां भारी तबाही हुई।
  • जहाज पर हमला: गुरुवार सुबह रास लफान से 4 नॉटिकल मील दूर समुद्र में एक जहाज पर अज्ञात चीज से हमला हुआ।
  • कर्मचारियों की सुरक्षा: QatarEnergy ने बताया है कि हमले में कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है और सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं।
  • UKMTO की रिपोर्ट: ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने जहाज पर हुए हमले की पुष्टि की है और बताया कि क्रू के सभी सदस्य सुरक्षित हैं।
  • आग पर काबू: कतर के आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि सिविल डिफेंस की टीमों ने रास लफान परिसर में लगी आग पर काबू पा लिया है।

कतर सरकार की कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

कतर के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए सीधा खतरा बताया है। सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कतर में मौजूद ईरान के सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों को 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का फरमान सुना दिया है। इन अधिकारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ यानी अवांछित व्यक्ति घोषित किया गया है।

इधर अमेरिका ने भी इस मामले में अपनी स्थिति साफ कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर कतर के ऊर्जा ठिकानों पर फिर से कोई हमला होता है, तो अमेरिका इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। ईरान ने पहले ही कतर और अन्य पड़ोसी देशों के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी थी, जिसके बाद यह हमला हुआ है। इस स्थिति से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।