तीसरे दौर में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अब कतर की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम का पूरा ध्यान अक्टूबर में होने वाले चौथे दौर के प्ले-ऑफ पर केंद्रित हो गया है, जहां 2026 विश्व कप में जगह बनाने का अंतिम मौका मिलेगा.

कतर का क्वालीफाइंग कैंपेन मंगलवार को उज्बेकिस्तान से 0-3 की हार के साथ समाप्त हुआ। उज्बेकिस्तान पहले ही वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई कर चुका था. इस हार के बाद कतर ग्रुप ए में चौथे स्थान पर रहा — संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से दो अंक पीछे. उसे प्ले ऑफ में अच्छा प्रदर्शन करना होगा.

अक्टूबर में होने वाले इस महत्वपूर्ण चौथे राउंड में ये टीमें शामिल होंगी:

  • कतर

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

  • इराक

  • ओमान

  • सऊदी अरब

  • इंडोनेशिया

इन सभी को दो ग्रुपों में बांटा जाएगा (ड्रा 17 जुलाई को होगा). हर ग्रुप में तीन टीमें होंगी और सिर्फ शीर्ष टीम सीधे वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालिफाई करेगी. कतर की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम 2025 के कोच जुलेन लोपेटेगुई ने कहा कि हमें पता है कि हम एक मुश्किल समय में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, और यह भी पता है कि वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा. हम अक्टूबर में होने वाले एशियन क्वालीफायर के चौथे राउंड में एक और मौका पाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगायेंगे. हमें अपना सब कुछ झोंकना होगा ताकि हम खुद को एक और अवसर दे सकें.

2026 फीफा वर्ल्ड कप एशियाई क्वालिफायर का तीसरा राउंड कतर के लिए एक उथल-पुथल भरा सफ़र साबित हुआ — जिसकी शुरुआत हार से हुई और अंत भी उसी तरह से हुआ.

अस्थिरता और बदलाव:

  • पहला मैच: कतर ने यूएई से 3-1 से हार के साथ अभियान की शुरुआत की — एक नतीजा जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी.

  • खराब प्रदर्शन: इसके बाद टीम लगातार असंभव और निराशाजनक हारों का शिकार हुई, जिसने टीम का आत्मविश्वास हिला दिया.

  • बदले गए कोच: खराब प्रदर्शन के चलते दो बार कोच बदले गए और अंत में जुलेन लोपेटेगुई को टीम की बागडोर सौंपी गई.

कतर की विश्व कप यात्रा: उतार-चढ़ाव और अंतिम उम्मीदें

तीसरे राउंड की समाप्ति कतर फुटबॉल टीम के लिए सवालों से भरी, लेकिन कुछ उम्मीदों से सजी रही. जहां एक ओर हार की निराशा थी, वहीं कुछ जीतों ने यह भी दिखाया कि टीम में अभी भी दमखम बाकी है.

कतर को क्या करना होगा

  1. निरंतरता — हर मैच में एक जैसी प्रतिबद्धता और रणनीति.

  2. मानसिक मजबूती — हार के डर को भुलाकर जीतने की मानसिकता.

  3. लोपेटेगुई की लीडरशिप — नया कोचिंग स्टाफ अगर सही संयोजन बनाता है, तो टीम फिर से पटरी पर लौट सकती है.