कतर में गहराया आर्थिक संकट, ईरान से युद्ध के कारण सरकार ने खर्चे में की भारी कटौती.

Praggya Singh sabal23 August 20263 min read137 viewsQatar
कतर में गहराया आर्थिक संकट, ईरान से युद्ध के कारण सरकार ने खर्चे में की भारी कटौती.

ईरान के साथ चल रहे गंभीर तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच कतर सरकार ने देश में बड़े पैमाने पर वित्तीय पाबंदियों और खर्चे में कटौती का ऐलान किया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 22 अगस्त 2026 को सामने आई इस जानकारी से यह साफ हो गया है कि देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए सरकारी विभागों के बजट में सीधे 30 प्रतिशत तक की कमी कर दी गई है। इसके अलावा विदेशी मदद पर दिए जाने वाले खर्च में भी लगभग 85 प्रतिशत की बड़ी कटौती की गई है, जिससे वहां रह रहे आम लोगों और कामगारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

लिक्विड नेचुरल गैस सेक्टर को भारी नुकसान

कतर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले लिक्विड नेचुरल गैस यानी एलएनजी सेक्टर पर इस संघर्ष का सबसे बुरा असर पड़ा है। ईरान की तरफ से रास लाफ्तान इंडस्ट्रियल सिटी पर किए गए हमलों के कारण दुनिया के इस सबसे बड़े एलएनजी निर्यात केंद्र को भारी क्षति पहुंची है। इन हमलों की वजह से देश की कुल निर्यात क्षमता में 17 प्रतिशत की सीधी गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि इस बड़े इंडस्ट्रियल प्लांट की मरम्मत में आने वाले समय में लगभग 5 साल तक का लंबा वक्त लग सकता है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

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राजस्व का भारी नुकसान और जीडीपी में गिरावट

गोल्डमैन सैक्स के जाने-माने मिडिल ईस्ट इकोनॉमिस्ट फारूक सौस्सा के मुताबिक, ऊर्जा निर्यात से मिलने वाले राजस्व के बंद होने से हर हफ्ते कतर और कुवैत को मिलाकर 1.5 अरब डॉलर से 2 अरब डॉलर यानी भारतीय रुपयों में बहुत बड़ी रकम का नुकसान हो रहा है। इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने अप्रैल 2026 में यह अनुमान लगाया था कि इस पूरे साल कतर की जीडीपी में 8.6 प्रतिशत की भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के छह देशों में यह आर्थिक मोर्चे पर सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है, जिसका सीधा असर वहां की आम जिंदगी पर पड़ रहा है।

सरकारी फंड और भविष्य की योजनाएं

इन तमाम आर्थिक दबावों और मुश्किल हालातों के बावजूद एक सरकारी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि देश के पास इस संकट से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन और मजबूती मौजूद है। सरकार अपने सॉवरेन वेल्थ फंड यानी कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की मदद ले रही है, जिसके पास लगभग 500 अरब डॉलर की संपत्ति सुरक्षित है। मिडिल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल Affairs के सीनियर फेलो तारिक यूसेफ का कहना है कि सरकार ने अब तक स्थिति को काफी हद तक संभाल कर रखा है, लेकिन अगर यह क्षेत्रीय संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में अधिकारियों को और भी कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक हलचल

क्षेत्रीय राजनीति में तनाव उस समय और बढ़ गया जब 22 अगस्त 2026 को ईरानी सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी कि वे अमेरिका समर्थित पाबंदियों का समर्थन न करें, वरना उन्हें ईरान का दुश्मन माना जाएगा। इसके अगले दिन यानी 23 अगस्त 2026 को ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कतर से यह मांग की कि वे हिरासत में लिए गए ईरानी पायलटों को किसी समुद्री ठिकाने से हटाकर जमीन पर बने किसी अस्पताल में भर्ती कराएं, क्योंकि उनकी सेहत लगातार खराब हो रही है। दूसरी तरफ, कतर सरकार लगातार यह साफ कर रही है कि वे खोज और बचाव अभियानों के साथ-साथ शवों को वापस भेजने के मामले में ईरान के साथ जरूरी बातचीत और समन्वय बनाए हुए है, जबकि यूएई ने भी 19 अगस्त 2026 के हफ्ते से ईरान पर पूर्ण व्यापारिक और वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए हैं।

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