अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी खत्म करने के लिए एक बड़ी कोशिश हो रही है। स्विट्जरलैंड में होने वाली जरूरी मीटिंग भले ही टल गई हो, लेकिन कतर ने दोनों देशों को फिर से बातचीत की मेज पर लाने का जिम्मा उठाया है। अब चर्चा इस बात पर है कि ईरान के करोड़ों डॉलर के फंड को कैसे रिलीज किया जाए।

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इस्लामाबाद समझौता और मुख्य शर्तें

बीते 17 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ‘Islamabad Memorandum of Understanding (MoU)’ पर साइन किए। इस समझौते में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इस 14 सूत्रीय समझौते की कुछ खास बातें नीचे दी गई हैं:

  • सैन्य अभियानों को तुरंत और हमेशा के लिए रोका जाएगा।
  • अगले 60 दिनों के भीतर एक फाइनल डील पर बातचीत पूरी करने का वादा किया गया है।
  • Strait of Hormuz को फिर से खोलने और ईरान के बंदरगाहों से अमेरिकी नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी।
  • ईरान को तेल बेचने के लिए प्रतिबंधों में छूट दी जाएगी।
  • ईरान की लगभग 100 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति को वापस करने पर चर्चा होगी।

स्विट्जरलैंड मीटिंग क्यों टली

इस समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में तकनीकी बातचीत का पहला दौर होना था, लेकिन 19 जून को इसे टाल दिया गया। व्हाइट हाउस ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance लॉजिस्टिक समस्याओं की वजह से स्विट्जरलैंड नहीं जा सके। हालांकि, ज्यूरिख के सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज की डॉ. Gorana Grgic ने साफ किया कि यह मीटिंग पूरी तरह रद्द नहीं हुई है, बल्कि इसे सिर्फ स्थगित किया गया है। स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री Ignazio Cassis ने कहा कि वे बातचीत की सुविधा देने के लिए अभी भी तैयार हैं।

कतर की भूमिका और फंड का मामला

कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman bin Jassim Al Thani ने साफ तौर पर कहा है कि कतर दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण बातचीत का समर्थन करता है। कतर का मानना है कि इससे पूरे इलाके की सुरक्षा बढ़ेगी। ताजा अपडेट के मुताबिक, अमेरिका और कतर एक ऐसी योजना बना रहे हैं जिससे मानवीय कार्यों के लिए कतर में जमा ईरान के लगभग 6 अरब डॉलर रिलीज किए जा सकें। हालांकि, ईरान ने अभी इस पर अपनी सहमति नहीं दी है।

लेबनान युद्धविराम और ईरान का रुख

इस बीच, अमेरिका और कतर की मध्यस्थता और ईरान के समर्थन से इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच लेबनान में युद्धविराम की बात सामने आई थी। दूसरी तरफ, ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Mojtaba Khamenei ने इस समझौते को मंजूरी तो दी, लेकिन उन्होंने कुछ आपत्तियां भी जताईं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि अब कोई जल्दबाजी नहीं है क्योंकि शुरुआती समझौता हो चुका है और अब अगले कदम समझौते को लागू करने पर निर्भर करेंगे। ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने चेतावनी दी है कि अगर समझौते का उल्लंघन हुआ, तो तेहरान इसका कड़ा जवाब देगा।