कतर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपनी आवाज़ बुलंद की है। कतर के मुताबिक जब तक नक़बा (Nakba) को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक इस मसले का कोई स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान नहीं निकल सकता। यह बयान संयुक्त राष्ट्र में कतर की प्रतिनिधि ने दुनिया के सामने रखा है।
नक़बा की पहचान क्यों है जरूरी?
कतर की संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि Sheikha Alya Ahmed bin Saif Al-Thani ने 18 मई 2026 को एक विशेष बैठक में यह बात कही। उन्होंने बताया कि नक़बा की 78वीं बरसी के मौके पर यह साफ हो गया कि इसे मान्यता देना किसी भी स्थायी शांति के लिए बुनियादी जरूरत है। कतर ने जनरल असेंबली के प्रस्ताव 79/82 का समर्थन किया है। उनका कहना है कि फिलिस्तीन को 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए, जिसकी राजधानी पूर्वी जेरूसलम हो।
इज़राइल की किन हरकतों पर कतर ने जताई नाराजगी?
- वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी जमीन को इज़राइल की ‘स्टेट लैंड’ बताना गलत है।
- बस्तियों के निर्माण की रफ्तार बढ़ाना और मृत्युदंड वाला कानून लाना जायज नहीं है।
- जेरूसलम में इबादत की आजादी पर पाबंदी लगाना गलत है।
- गाजा पट्टी में युद्धविराम समझौते को पूरी तरह लागू करना और मानवीय मदद के लिए रास्तों को खोलना जरूरी है।
बच्चों और मानवीय मदद पर क्या कहा?
कतर ने इस बात पर जोर दिया कि उन सभी फिलिस्तीनी बच्चों के नाम याद रखे जाएं जो इस संघर्ष में मारे गए। उन्हें मौजूदा नक़बा का शिकार बताया गया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 को लागू करने की मांग की गई ताकि गाजा में लोगों तक बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता पहुंच सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कतर ने UN में क्या मांग की?
कतर ने मांग की कि फिलिस्तीन मुद्दे को सुलझाने के लिए नक़बा की मान्यता जरूरी है और 1967 की सीमा के आधार पर एक स्वतंत्र देश का गठन होना चाहिए।
Sheikha Alya ने किन मुद्दों पर चिंता जताई?
उन्होंने वेस्ट बैंक में जमीन कब्जाने, बस्तियों के विस्तार और जेरूसलम में इबादत पर लगी पाबंदियों के साथ-साथ गाजा में मानवीय मदद की कमी पर चिंता जताई।
