लाल सागर (Red Sea) में हूतियों द्वारा सऊदी अरब की ओर जाने वाले जहाजों को रोकने की धमकी के बाद खाड़ी देशों में चिंता बढ़ गई है। Qatar ने 21 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि यमन और समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर UN के प्रस्तावों को सख्ती से लागू किया जाए। Qatar Ministry of Foreign Affairs ने हूतियों के दावों को पूरी तरह खारिज किया है और सऊदी अरब के साथ अपनी एकजुटता दोहराई है।
क्या है मामला और क्यों बढ़ा तनाव
हूतियों ने 20 जुलाई 2026 को सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन के बंदरगाहों पर घेराबंदी कर रहा है। इसके जवाब में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अपनी व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने हूतियों के आरोपों को गलत बताया और कहा कि वे लंबे समय से यमन के मानवीय संकट को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय जगत की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर UN Secretary-General के प्रवक्ता ने चिंता जताई है और सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। Kuwait ने भी हूतियों की इस धमकी की निंदा की और सऊदी अरब का साथ देने का भरोसा दिया। हाल ही में 14 जुलाई 2026 को UN Security Council ने Resolution 2826 पास किया था, जिसके तहत लाल सागर में हूतियों के हमलों की हर महीने रिपोर्ट दी जाएगी। यह तनाव 13 जुलाई को सना एयरपोर्ट पर हुए एयरस्ट्राइक और उसके बाद हूतियों द्वारा सऊदी के Abha International Airport पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद और अधिक बढ़ गया है।
