Qatar ने अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत शुरू करने की सलाह दी है ताकि खाड़ी देशों में तनाव को बढ़ने से रोका जा सके। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी ने कहा कि दोनों देशों को अपने पुराने समझौतों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि Strait of Hormuz में जहाजों का सुरक्षित निकलना बहुत जरूरी है क्योंकि यह दुनिया के व्यापार के लिए एक मुख्य रास्ता है और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है।
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान को इस समुद्री रास्ते पर ऐसी संप्रभुता दी गई जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो, तो इस क्षेत्र के अन्य देश उनके कब्जे में आ जाएंगे।
दूसरी तरफ, अमेरिका की नेवल फोर्सेज (USNAVCENT) ने साफ कर दिया है कि कोई भी देश इस रास्ते को बंद करने या नियंत्रित करने का अधिकार नहीं रखता है। अमेरिकी अधिकारी अब ईरान से यह मांग कर रहे हैं कि वह सार्वजनिक तौर पर जहाजों के सुरक्षित निकलने की गारंटी दे और कमर्शियल जहाजों पर हमले बंद करे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत पर सहमति बनी थी, लेकिन हालिया हमलों के बाद अब युद्धविराम खत्म हो गया है।
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ समुद्री सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा की है। साथ ही, सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसला बिन फरहान ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से तालमेल बिठाने के लिए बातचीत की है।
खतरे का स्तर और ईरान का रुख
UK Maritime Trade Operations (UKMTO) ने 11 जुलाई 2026 तक Strait of Hormuz में समुद्री सुरक्षा के खतरे को ‘गंभीर’ बताया है। यह तनाव ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामनेई द्वारा अपने पिता की मौत का बदला लेने की कसम खाने के बाद और बढ़ गया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने निजी तौर पर यह माना है कि व्यापारिक जहाजों पर हमला करना एक गलती थी और वह अब फिर से बातचीत करना चाहता है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची 11 जुलाई को ओमान पहुंचे थे, जहां जहाजों की सुरक्षा और इस समुद्री रास्ते पर चर्चा हुई।
तनाव कम करने के लिए कतर, ईरान और ओमान के अधिकारी मस्कट में इकट्ठा हुए। इस मीटिंग का मकसद जहाजों के लिए ‘मीडियन लेन’ को पूरी तरह खोलना था ताकि व्यापारिक जहाज बिना किसी रुकावट के निकल सकें, जो कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उनका अधिकार है। इस मुश्किल हालात को सुधारने के लिए पाकिस्तान भी बीच-बचाव की कोशिशें कर रहा है।
