कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को Strait of Hormuz का इस्तेमाल खाड़ी देशों पर दबाव बनाने या उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए नहीं करना चाहिए। यह मामला अब काफी गंभीर होता जा रहा है क्योंकि यह रास्ता दुनिया के तेल और व्यापार के लिए बहुत जरूरी है।

कतर और तुर्की ने ईरान को लेकर क्या कहा?

दोहा में तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz को किसी भी तरह के हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भी इस बात का समर्थन किया और कहा कि इस रास्ते को फिर से खोलना चाहिए। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की मदद से ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चलाने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि इस लड़ाई को खत्म किया जा सके।

Strait of Hormuz के बंद होने से क्या खतरा है?

कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने पहले ही बता दिया था कि इस रास्ते को बंद करना बिल्कुल गलत है। अगर यह रास्ता बंद होता है तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई रुक सकती है और खाने-पीने की चीजों की कमी हो सकती है। वर्तमान में पश्चिम एशिया के युद्ध की वजह से यह रास्ता ब्लॉक हो चुका है, जिससे खाड़ी देशों के समुद्री निर्यात पर बुरा असर पड़ा है। कतर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बीच-बचाव कर रहा है ताकि इस संकट को सुलझाया जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

कतर ने ईरान को क्या चेतावनी दी है?

कतर के विदेश मंत्री ने कहा है कि ईरान को Strait of Hormuz का इस्तेमाल खाड़ी देशों को ब्लैकमेल करने या उन पर दबाव बनाने के लिए नहीं करना चाहिए और इसे हथियार नहीं बनाना चाहिए।

इस मामले में तुर्की और पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

तुर्की ने कतर के स्टैंड का समर्थन किया है और रास्ते को फिर से खोलने की मांग की है। वहीं, पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकालने में मदद कर रहा है।