ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कतर ने एक बड़ी कोशिश की है। कतर का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान गया था जहाँ उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। अब यह टीम अपनी मुलाकात खत्म करके वापस लौट आई है।

यह कतरी टीम 14 जून को तेहरान पहुँची थी और 15 जून को वहाँ से रवाना हुई। इस दौरान ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत को अंतिम रूप देने के लिए गहन चर्चा हुई।

क्या है इस समझौते की बात

बातचीत मुख्य रूप से 14 पॉइंट्स वाले एक समझौते (MoU) पर केंद्रित थी। इस योजना के दो हिस्से हैं। पहले एक शुरुआती समझौता होगा और उसके बाद करीब 60 दिनों तक बातचीत चलेगी ताकि अंतिम डील पूरी की जा सके।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने बताया कि जल्द ही एक शुरुआती समझ के बारे में ऐलान हो सकता है, लेकिन अभी सब कुछ फाइनल नहीं हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका को ऐसी गारंटी देनी होगी जिससे भविष्य में दोबारा समझौते को तोड़ा न जा सके।

बड़े नेताओं के दावे

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के साथ डील पूरी हो चुकी है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने का आदेश भी दे दिया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी इसे शांति समझौता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अब लेबनान समेत सभी युद्ध क्षेत्रों में सैन्य अभियान तुरंत और हमेशा के लिए बंद करेंगे। कतर के प्रधानमंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने इस समझौते का स्वागत किया और इसमें पाकिस्तान की मध्यस्थता की तारीफ की।

ईरान के अंदर विरोध और शक

भले ही बाहर से डील की खबरें आ रही हों, लेकिन ईरान के अंदर स्थिति कुछ अलग दिखी। 14 जून को ईरान के कुछ अधिकारियों और IRGC ने इस डील पर शक जताया। उनका कहना था कि अभी ढांचे पर फैसला होना बाकी है। इसी बीच ईरान के मशहद शहर में विरोध प्रदर्शन भी हुए, जहाँ लोगों ने राजनयिकों के खिलाफ नारे लगाए।

खबरों के मुताबिक, इस समझौते पर औपचारिक दस्तखत 19 जून को स्विट्जरलैंड में हो सकते हैं।