राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने हवाई यात्रा करने वाले आम लोगों की बड़ी परेशानी को संसद में रखा है। उन्होंने कहा कि जब एयरलाइंस एक-एक किलो एक्स्ट्रा सामान के लिए पैसे वसूलती हैं, तो फ्लाइट लेट होने पर यात्रियों को उनके खराब हुए समय का पैसा क्यों नहीं मिलता। यह मुद्दा संसद में Bharatiya Vayuyan Vidheyak Bill पर चर्चा के दौरान जोर-शोर से उठाया गया है।

हर घंटे के हिसाब से मिले हर्जाना

Raghav Chadha ने सरकार को सुझाव दिया है कि एयरलाइंस के लिए “Hourly Compensation” मॉडल लागू होना चाहिए। उनका कहना है कि आज के समय में हर यात्री के वक्त की कीमत होती है। जिस तरह एयरलाइंस वजन बढ़ने पर ऑटोमैटिक सिस्टम से चार्ज लगा देती है, वैसे ही फ्लाइट लेट होने पर बिना मांगे यात्रियों के बैंक खाते में मुआवजा आना चाहिए। अभी के सिस्टम में यात्रियों को हर्जाना लेने के लिए काफी पेपरवर्क करना पड़ता है और अक्सर उन्हें कुछ नहीं मिलता।

फ्लाइट लेट होने पर अभी कितना पैसा मिलता है?

DGCA ने जून 2025 में नए नियम बनाए थे, जिसके तहत यात्रियों को देरी होने पर कुछ अधिकार दिए गए हैं। हालाँकि, इसमें मौसम खराब होने जैसी शर्तें एयरलाइंस को बचा लेती हैं।

  • 2 से 3 घंटे की देरी होने पर एयरलाइन को मुफ्त खाना और नाश्ता देना होता है।
  • 3 से 5 घंटे की देरी पर 2,000 रुपये मुआवजा या दूसरी फ्लाइट का विकल्प मिलता है।
  • 5 घंटे से ज्यादा देरी होने पर 4,000 रुपये मिलते हैं या पूरा रिफंड क्लेम किया जा सकता है।
  • अगर फ्लाइट 8 घंटे से ज्यादा लेट हो या रात भर रुकना पड़े तो होटल और 5,000 रुपये मिलते हैं।

एयरलाइंस अभी अलग से कितना चार्ज करती है?

हवाई सफर में अब टिकट के अलावा भी कई चीजों के लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियां 15 किलो से ऊपर सामान होने पर प्रति किलो 600 से 650 रुपये तक चार्ज करती हैं। इसके अलावा अपनी पसंद की सीट लेने के लिए यात्रियों को 150 रुपये से लेकर 2,500 रुपये तक अलग से देने पड़ते हैं। राघव चड्ढा ने एयरपोर्ट पर महंगी पार्किंग का भी जिक्र किया, जहाँ दिल्ली जैसे शहरों में एक घंटे के 250 रुपये तक लग जाते हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.