रायपुर की एक कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उनके डीलर को एक बड़ा आदेश दिया है। मामला रायपुर के डॉक्टर प्रेमराज देवता की ‘Grand Vitara Strong Hybrid Zeta Plus’ कार से जुड़ा है, जिसे उन्होंने 3 जून 2024 को खरीदा था। कार में कुछ ही महीनों के भीतर इंजन की समस्याएं शुरू हो गईं और जांच में पता चला कि कार का इंजन देश में उपलब्ध E-20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के साथ सही से काम नहीं कर रहा है।
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कोर्ट का क्या है आदेश
रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 14 जुलाई 2026 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कंपनी और डीलर को निर्देश दिया है कि वे या तो ग्राहक को नई E-20 अनुकूल कार दें या फिर गाड़ी की पूरी कीमत वापस करें। ग्राहक को कुल ₹2,050,494 का रिफंड देना होगा, जिसमें गाड़ी की कीमत, रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस की रकम शामिल है। इसके अलावा, मानसिक परेशानी के लिए ₹1 लाख और कानूनी खर्च के लिए ₹10,000 का भुगतान करने को कहा गया है। अगर 45 दिनों के भीतर यह भुगतान नहीं हुआ, तो कंपनी को 7% सालाना ब्याज के साथ पैसे देने होंगे।
मारुति सुजुकी का पक्ष
मारुति सुजुकी ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है और इसे स्टेट कंज्यूमर कमीशन में चुनौती देने की बात कही है। कंपनी का कहना है कि गाड़ी को E-20 पेट्रोल के हिसाब से ही बनाया गया था और समस्या खराब ईंधन के कारण हुई है। वहीं, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट किया था कि 1 अप्रैल 2023 के बाद बिकने वाली कारों में E-20 पेट्रोल के लिए जरूरी कलपुर्जे लगे होने चाहिए। उपभोक्ता फोरम ने इस बात पर जोर दिया कि आम ग्राहकों के पास E-20 पेट्रोल के अलावा ईंधन का कोई दूसरा व्यावहारिक विकल्प मौजूद नहीं है।
