यूएई के रास अल खैमाह में पिछले 40 से अधिक वर्षों से रह रहे एक भारतीय प्रवासी दंपत्ति की भारत के केरल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। यह घटना शनिवार, 23 मई 2026 को उस समय हुई जब वे वापस यूएई जाने के लिए अपनी फ्लाइट पकड़ने वाले थे। इस घटना से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और उनके परिचितों के बीच गहरा दुख है और पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

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केरल में फ्लाइट पकड़ने से ठीक पहले क्या हुआ?

यह प्रवासी दंपत्ति केरल में अपने घर आए हुए थे और शनिवार शाम को उनकी रास अल खैमाह वापस लौटने की टिकट बुक थी। फ्लाइट के समय से कुछ ही घंटे पहले दंपत्ति के शव उनके घर में मिले। पति का शव फांसी के फंदे से लटका हुआ पाया गया, जबकि पत्नी का शव बेडरूम में अचेत अवस्था में मिला। दंपत्ति के दो बच्चे हैं जो खुद भी यूएई में रहते हैं। इस घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस जांच और शवों को दफनाने का फैसला क्यों लिया गया?

भारतीय पुलिस इस पूरे मामले की जांच आत्महत्या और किसी बाहरी साजिश दोनों कोणों से कर रही है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पत्नी की मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। आमतौर पर हिंदू रीति-रिवाजों में शव का दाह संस्कार किया जाता है, लेकिन पुलिस की सलाह पर शवों को रविवार को दफनाया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि यदि भविष्य में जांच के लिए दोबारा फॉरेंसिक विश्लेषण की आवश्यकता पड़े, तो अवशेषों को सुरक्षित निकाला जा सके।

दंपत्ति का यूएई और केरल में क्या कारोबार था?

यह परिवार रास अल खैमाह में एक बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाता है। इसके अलावा केरल में भी उनके कई अन्य व्यवसाय हैं। चार दशकों से अधिक समय से रास अल खैमाह में रहने के कारण वे स्थानीय प्रवासी समुदाय में काफी जाने-माने थे। इस घटना के बाद से खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों में चिंता और शोक का माहौल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

मृतक दंपत्ति कहां के निवासी थे?

मृतक दंपत्ति मूल रूप से भारत के केरल के रहने वाले थे और पिछले 40 से अधिक वर्षों से यूएई के रास अल खैमाह में रह रहे थे।

हिंदू रीति-रिवाजों के विपरीत शवों को क्यों दफनाया गया?

पुलिस जांच के दौरान यदि आगे किसी फॉरेंसिक जांच या पुनः परीक्षण की आवश्यकता पड़े, तो शवों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उन्हें दाह संस्कार के बजाय दफनाने का निर्णय लिया गया।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com