Iran News: ईरान के पहाड़ों में दिखा बेहद दुर्लभ पल्लास कैट, कैमरे में कैद हुई तस्वीर तो वैज्ञानिकों ने जताई खुशी.

Praggya Singh sabal17 August 20262 min read71 viewsWorld
Iran News: ईरान के पहाड़ों में दिखा बेहद दुर्लभ पल्लास कैट, कैमरे में कैद हुई तस्वीर तो वैज्ञानिकों ने जताई खुशी.

उत्तरी ईरान के मजमादार प्रांत से एक बहुत ही हैरान करने वाली और रोमांचक खबर सामने आई है, जहां पहाड़ों के बीच एक बहुत ही दुर्लभ बिल्ली को देखा गया है। 17 अगस्त 2026 को जारी किए गए फुटेज से इस बात की पुष्टि हुई है कि ईरान के पहाड़ी नवा हाइलैंड्स में पल्लास कैट को देखा गया है। इस दुर्लभ जंगली बिल्ली को मैनुल के नाम से भी जाना जाता है, और इसकी खोज ने वैज्ञानिक जगत में हलचल मचा दी है। इस बिल्ली की तस्वीर एक कैमरा ट्रैप के जरिए ली गई है, जिससे यह पता चलता है कि यह जानवर अब एल्बोर्ज पर्वत श्रृंखला और ह्रीकेनियन क्षेत्र तक फैल रहा है, जबकि यह इलाका इस जीव का पारंपरिक मैदानी घर नहीं माना जाता था।

पल्लास कैट की खासियत और खतरे

प्रकृति प्रेमी मजीद बातेबी ने इस खोज के महत्व पर बात करते हुए बताया कि मजमादार के पहाड़ी इलाकों को बचाना अब बहुत जरूरी हो गया है। इन इलाकों में माइनिंग यानी खनन और अत्यधिक पशुपालन जैसी गतिविधियों के कारण इस दुर्लभ बिल्ली के प्राकृतिक आवास को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। पल्लास कैट ईरान के सबसे कम अध्ययन किए गए जंगली जीवों में से एक है, और देश में इनकी कुल संख्या कितनी है, इसकी सही जानकारी अभी तक किसी के पास नहीं है। हालांकि इस प्रजाति को आईयूसीएन रेड लिस्ट में 'Least Concern' यानी कम खतरे वाली श्रेणी में रखा गया है, लेकिन इसे CITES Appendix II के तहत विशेष संरक्षण मिला हुआ है और ईरान में इसका शिकार करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

संरक्षण के लिए चल रहे हैं विशेष प्रयास

इस दुर्लभ जीव को बचाने के लिए कई बड़े संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। फ्यूचर4लेपर्ड्स फाउंडेशन, पल्लास कैट इंटरनेशनल कंजर्वेशन अलायंस और ईरान के पर्यावरण विभाग मिलकर संयुक्त प्रयास कर रहे हैं ताकि इस प्रजाति के रहने के तौर-तरीकों को ठीक से समझा जा सके। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को भी इस संरक्षण अभियान से जोड़ा जा रहा है ताकि इस जीव की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का यह कहना है कि इस बिल्ली की ग्लोबल रेंज के पश्चिमी छोर पर मौजूदगी को सुरक्षित रखने के लिए आगे भी वैज्ञानिक स्तर पर गंभीर शोध करने की सख्त जरूरत है, ताकि इस अनोखे जीव को विलुप्त होने से बचाया जा सके।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin
Share:

Comments

Leave a comment