श्रीलंका मुस्लिम कांग्रेस के नेता और कैंडी के सांसद Rauff Hakeem ने भारत और श्रीलंका के बीच दशकों पुराने मछुआरा विवाद को हल करने के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया है। उन्होंने 1 अगस्त 2026 को तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कहा कि दोनों देशों के मछुआरों की आजीविका एक गंभीर विषय है और इसके लिए करुणा के साथ एक स्थायी समाधान की जरूरत है। उन्होंने तमिलनाडु सरकार और भारतीय केंद्र सरकार से श्रीलंका के अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने की अपील की है।
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विवाद का कारण और वर्तमान स्थिति
पाक जलडमरूमध्य में मछली पकड़ने के दौरान सीमा पार करने के आरोप में भारतीय मछुआरों की गिरफ्तारी और उनकी नावों को जब्त करने का सिलसिला लगातार जारी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023 से अब तक श्रीलंका में 1,300 से अधिक भारतीय मछुआरे गिरफ्तार किए गए हैं। 23 जुलाई 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी 30 मछुआरे और 171 नौकाएं श्रीलंका की हिरासत में हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा मछुआरे तमिलनाडु से हैं।
सरकारी प्रयास और चुनौतियां
भारत सरकार के विदेश राज्य मंत्री Kirti Vardhan Singh ने इस मुद्दे को राजनयिक चैनलों के माध्यम से श्रीलंका के सामने बार-बार उठाया है। वे लगातार मछुआरों की रिहाई और उनकी नावों की वापसी की मांग करते रहे हैं। हालांकि, इस मामले में Bottom Trawling यानी समुद्र तल से मछली पकड़ने की तकनीक एक बड़ी बाधा बनी हुई है। श्रीलंका ने जुलाई 2016 में इस तकनीक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि यह समुद्री संसाधनों को काफी नुकसान पहुंचाती है। भारत और श्रीलंका का संयुक्त कार्य समूह इस विवाद पर बातचीत कर रहा है, जिसकी आखिरी बैठक अक्टूबर 2024 में हुई थी। खराब मौसम के कारण हाल ही में 31 जुलाई 2026 को श्रीलंका ने कई समुद्री क्षेत्रों में मछली पकड़ने के काम पर अस्थायी रोक भी लगाई थी।
