भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने उत्तर प्रदेश (यूपी) और बिहार में छोटे ऋण बांटने वाली माइक्रो फाइनेंस कंपनियों और नॉन-बैंकिंग संस्थाओं (NBFCs) को सतर्क रहने की सलाह दी है। आरबीआई चाहती है कि इन दोनों राज्यों में ऋण बांटने की गति को धीमा किया जाए।

ऋण का डूबने का डर

आरबीआई की चिंता है कि यूपी और बिहार में धड़ल्ले से दिया जा रहा ऋण डूब सकता है, क्योंकि इस ऋण के बदले बैंकों के पास कोई ठोस गारंटी नहीं है। दोनों राज्यों में बांटे जाने वाले कुल छोटे ऋण का 25.30% हिस्सा शामिल है।

बिहार में भारी संख्या

बिहार में ऋण लेने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, जहां 40 से अधिक माइक्रो फाइनेंस कंपनियां सक्रिय हैं। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में बांटे गए कुल छोटे ऋण का 25.30% सिर्फ यूपी और बिहार में दिया गया है। यह ऋण मुख्यतः निम्न आय वर्ग की महिलाओं को दिया गया है।

वसूली का कोई जरिया नहीं

इन ऋणों के बदले बैंकों के पास वसूली करने का कोई जरिया नहीं है, क्योंकि माइक्रो फाइनेंस ऋण के लिए गारंटी लेने का कोई प्रावधान नहीं होता। यह ऋण ज्यादातर छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए दिए जाते हैं।

चिंताजनक गति

सेंटर ऑफ रिसर्च इन इंटरनेशनल फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी और बिहार में छोटे ऋण देने की जिस गति से बढ़ोतरी हो रही है, वह गंभीर चिंता का विषय है।

पैसे फंसने की संभावना

आरबीआई की चेतावनी साफ है कि इस तेज गति से दिए जा रहे ऋण की पुनर्प्राप्ति में कठिनाई आ सकती है, जिससे बैंकिंग सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

 

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