Reserve Bank of India (RBI) की अगली मीटिंग जून में होने वाली है जिसमें ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला लिया जाएगा। HSBC की एक्सपर्ट प्रंजुल भंडारी का मानना है कि RBI जून में ब्याज दरों को नहीं बदलेगा। फिलहाल महंगाई और बदलते मौसम की वजह से बैंक काफी सोच-समझकर कदम उठा रहा है ताकि आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर बुरा असर न पड़े।
जून में क्या होगा RBI का फैसला और क्या हैं नियम
RBI की Monetary Policy Committee (MPC) की अगली मीटिंग 3, 4 और 5 जून 2026 को तय की गई है। अप्रैल 2026 के फैसले के बाद से फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है। RBI का मुख्य लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई को 2% से 6% के दायरे में रखना है, जबकि मध्यम अवधि के लिए इसका टारगेट 4% तय किया गया है।
ब्याज दरें न बदलने की बड़ी वजह क्या है
HSBC की चीफ इंडिया और आसियान इकोनॉमिस्ट प्रंजुल भंडारी ने बताया कि RBI के सामने इस वक्त दो अलग-अलग लक्ष्य हैं। एक तरफ महंगाई को रोकना है और दूसरी तरफ देश की आर्थिक ग्रोथ को सहारा देना है। ऊर्जा की कीमतों में बदलाव और एल नीनो जैसे अनिश्चित मौसम के कारण अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है। इसी वजह से बैंक ब्याज दरों को बढ़ाने के बजाय बैंकिंग सेक्टर में पैसों की उपलब्धता (Liquidity) बढ़ाने पर ध्यान दे सकता है।
RBI और ब्याज दरों से जुड़ी अहम जानकारियां
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| वर्तमान रेपो रेट | 5.25% |
| MPC मीटिंग की तारीख | 3, 4 और 5 जून 2026 |
| महंगाई टारगेट रेंज | 2% से 6% |
| मध्यम अवधि का महंगाई लक्ष्य | 4% |
| HSBC की भविष्यवाणी | पूरे साल 2026 तक दरें स्थिर रहेंगी |
| अन्य बैंक (HDFC, Nomura, Yes Bank) | मार्च 2027 तक कोई बदलाव नहीं |
| गोल्डमैन का पुराना अनुमान | 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना थी |
HDFC बैंक, नोमुरा इंडिया और यस बैंक के जानकारों का भी यही मानना है कि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए RBI मार्च 2027 तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रेपो रेट क्या है और इससे आम आदमी पर क्या असर पड़ता है
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर कमर्शियल बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। अगर रेपो रेट स्थिर रहता है या कम होता है, तो होम लोन और कार लोन जैसी ईएमआई (EMI) पर असर नहीं पड़ता या वे सस्ती हो जाती हैं।
क्या जून 2026 में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना है
HSBC और कई अन्य प्रमुख बैंकों के इकोनॉमिस्ट का मानना है कि जून में ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी और इन्हें 5.25% पर ही रखा जाएगा।