भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में विदेशी मुद्रा का फ्लो बढ़ाने और बाहरी फंडिंग को मजबूत करने के लिए दो नई फॉरेक्स स्वैप (forex swap) सुविधाओं की शुरुआत की है। इस बड़े फैसले का सीधा असर बैंकों और विदेशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों पर पड़ने वाला है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इन योजनाओं की घोषणा की है, जिससे देश में डॉलर की आवक बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

क्या हैं ये दो नई फॉरेक्स स्वैप योजनाएं और इनके नियम?

आरबीआई ने दो अलग-अलग तरह की स्वैप सुविधाएं शुरू की हैं। पहली सुविधा नए फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट यानी FCNR(B) डिपॉजिट के लिए है और दूसरी सुविधा एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) और ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग (OFCB) के लिए है। इन दोनों सुविधाओं के नियम और समय-सीमा नीचे दी गई तालिका में समझी जा सकती है:

सुविधा का नाम अंतिम तिथि मुख्य नियम और विशेषताएं
FCNR(B) डिपॉजिट सुविधा 30 सितंबर 2026 तक जमा के लिए (स्वैप विंडो 16 अक्टूबर 2026 तक खुली रहेगी) 3 से 5 साल के डिपॉजिट पर आरबीआई पूरा हेजिंग खर्च खुद उठाएगा। इसमें कम से कम 1 साल का लॉक-इन पीरियड होगा।
ECB और OFCB सुविधा 15 जनवरी 2027 तक (31 दिसंबर 2026 तक आए पैसों के लिए) पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSUs) के लिए 3 साल या उससे अधिक की मैच्योरिटी वाले कर्ज पर लागू। यह स्वैप 1.5% सालाना की निश्चित दर पर होगा।

खाड़ी देशों में रहने वाले NRI और प्रवासियों को कैसे होगा फायदा?

इस फैसले से खाड़ी देशों (Gulf Countries) सहित विदेशों में रहने वाले एनआरआई (NRI) और ओवरसीज सिटीजन्स ऑफ इंडिया (OCI) को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। चूंकि आरबीआई बैंकों के हेजिंग का पूरा खर्च खुद उठा रहा है, इसलिए भारतीय बैंक अब विदेशी मुद्रा जमा करने वाले प्रवासियों को पहले से कहीं बेहतर रिटर्न और ब्याज दरों की पेशकश कर सकेंगे। अगर आप डॉलर में अपनी बचत भारत के बैंकों में FCNR(B) खाते में जमा करते हैं, तो आपको अब अधिक फायदा मिलेगा। यह स्वैप सुविधा केवल अमेरिकी डॉलर में ही उपलब्ध होगी, भले ही प्रवासी किसी अन्य विदेशी मुद्रा में पैसा जमा करें।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा इसका असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई के इस कदम से भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी और विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोतरी होगी। यस बैंक (Yes Bank) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना से भारत में लगभग 35 से 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर का विदेशी निवेश आ सकता है। इससे भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को संभालने में मदद मिलेगी। साथ ही, बैंकों के काम को आसान बनाने के लिए आरबीआई ने 8 जून 2026 को यह भी घोषणा की है कि बैंकों को इस योजना के तहत आने वाले पैसे को अपने नेट ओवरनाइट ओपन पोजीशन लिमिट (NOP-INR) से बाहर रखने की छूट होगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

FCNR(B) डिपॉजिट के लिए क्या शर्तें रखी गई हैं?

इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए नए डिपॉजिट की अवधि 3 से 5 साल होनी चाहिए और इसमें कम से कम 1 साल का लॉक-इन पीरियड जरूरी है। यह सुविधा केवल अमेरिकी डॉलर में उपलब्ध होगी।

क्या यह स्कीम सभी विदेशी मुद्राओं के लिए खुली है?

प्रवासी अपनी जमा राशि किसी भी फ्रीली कनवर्टिबल करेंसी में दे सकते हैं, लेकिन आरबीआई के साथ होने वाली स्वैप सुविधा केवल अमेरिकी डॉलर (USD) में ही काम करेगी।

भारतीय बैंकों को इस योजना से क्या फायदा मिलेगा?

बैंकों का हेजिंग कॉस्ट कम हो जाएगा और आरबीआई ने उन्हें इस फंड को नेट ओवरनाइट ओपन पोजीशन लिमिट से बाहर रखने की छूट दी है, जिससे उनके पास काम करने की अधिक आजादी होगी।