भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर नए आंकड़े जारी किए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्ध विराम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है. इसी बदलाव को देखते हुए आरबीआई ने आने वाले समय के लिए तेल की कीमतों का एक नया बेंचमार्क सेट किया है, जिसका सीधा असर भारत की महंगाई दर और आम आदमी के बजट पर पड़ेगा.

ℹ: Kuwait Consulate Stormed: कुवैती दूतावास में तोड़फोड़ पर UAE ने जताई कड़ी आपत्ति, इराक सरकार से की बड़ी मांग.

ब्याज दरों और तेल की कीमतों पर क्या रहा आरबीआई का रुख?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा है. बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है. वहीं वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे और घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल तय किया गया है. तेल की कीमतों में कमी आने से भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है और इसका फायदा सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा.

महंगाई और जीडीपी ग्रोथ के लिए क्या है नया प्लान?

रिजर्व बैंक ने आने वाले सालों के लिए विकास दर और महंगाई के आंकड़ों की जानकारी साझा की है. बैंक का मानना है कि तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई को 4.6 प्रतिशत के स्तर पर लाने में मदद मिलेगी. खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों के लिए भी यह खबर अहम है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत होने से रुपये की वैल्यू में सुधार देखा गया है.

मुख्य जानकारी आंकड़े और विवरण
रेपो रेट (Repo Rate) 5.25 प्रतिशत (कोई बदलाव नहीं)
जीडीपी ग्रोथ (FY26) 7.6 प्रतिशत
जीडीपी ग्रोथ (FY27) 6.9 प्रतिशत
महंगाई अनुमान (FY27) 4.6 प्रतिशत
कच्चा तेल (FY26 बेंचमार्क) $85 प्रति बैरल
कच्चा तेल (FY27 बेंचमार्क) $75 प्रति बैरल

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में 13 से 16 प्रतिशत तक की कमी आई है. आरबीआई ने 8 अप्रैल 2026 को अपनी बैठक में फैसला लिया कि फिलहाल नीतिगत रुख को तटस्थ (Neutral) रखा जाएगा. बैंक अधिकारियों के अनुसार महंगाई की स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है ताकि आम जनता पर बोझ न बढ़े.