Red Sea में बड़ा हमला, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के सैन्य जहाजों को बनाया निशाना.

लाल सागर यानी Red Sea में सुरक्षा का माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण हो गया है। यमन के Houthi rebels ने 17 अगस्त 2026 को एक बड़ा दावा किया है। उनके मुताबिक, उन्होंने अल-मोखा के तट के पास सऊदी अरब के एक सैन्य लैंडिंग क्राफ्ट और चार एस्कॉर्ट जहाजों पर खतरनाक मिसाइल हमला किया। इस घटना के बाद से क्षेत्रीय राजनीति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। खासकर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां आने-जाने वाले लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हूती विद्रोहियों का दावा और नुकसान
हूती सेना के प्रवक्ता Yahya Saree ने मीडिया को जानकारी दी कि यह ऑपरेशन पूरी तरह से योजनाबद्ध था। उन्होंने दावा किया कि इस सटीक मिसाइल हमले में सऊदी अरब का लैंडिंग क्राफ्ट पूरी तरह से तबाह हो गया है। इसके अलावा, साथ चल रहे एस्कॉर्ट जहाजों को भी या तो डुबो दिया गया है या उनमें भीषण आग लग गई है। विद्रोहियों का कहना है कि इन जहाजों पर सऊदी अरब के सैन्यकर्मी और भारी मात्रा में हथियार ले जाए जा रहे थे। हालांकि, सऊदी अधिकारियों की तरफ से इस हमले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं आई है।
समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब इस इलाके में तनाव पहले से ही अपने चरम पर है। पिछले महीने यानी जुलाई 2026 में हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद से लगातार लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों पर खतरे मंडरा रहे हैं। हाल ही में 11 अगस्त को एक कार्गो शिप पर घातक हमला हुआ था जिसमें छह लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन हमलों से निपटने के लिए सऊदी अरब ने पहले ही कड़े कदम उठाए हैं। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सऊदी अरब ने 15 देशों का एक समुद्री रक्षा गठबंधन बनाया है, ताकि इस अहम व्यापारिक मार्ग को सुरक्षित रखा जा सके और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को बचाया जा सके।