Red Sea में भारतीय जहाज पर हूती हमला, 13 भारतीयों समेत 14 लोग बाल-बाल बचे, मची अफरातफरी

लाल सागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक बड़ी समुद्री घटना सामने आई है, जहां भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज MSV Faize Noore Oliya पर हमला हुआ। यह घटना 4 अगस्त 2026 को हुई, जब जहाज तेल लेकर सऊदी अरब से जा रहा था। हमले के बाद जहाज डूब गया, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। अच्छी बात यह रही कि यमनी कोस्ट गार्ड और नौसेना की तत्परता से जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। बचाए गए लोगों में 13 भारतीय नागरिक और एक यमनी नागरिक शामिल हैं, जिन्हें सुरक्षित मोखा बंदरगाह पहुंचाया गया है।
हमले के पीछे किसका हाथ और भारत की प्रतिक्रिया
यमनी नेशनल रेजिस्टेंस ने इस घटना को हूती विद्रोहियों द्वारा किया गया एक आतंकवादी हमला करार दिया है। रेजिस्टेंस का कहना है कि यह हमला हूती नियंत्रित बंदरगाहों से एक विस्फोटकों से लदी नाव के जरिए अंजाम दिया गया। इस पूरे मामले पर भारत सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई है। भारत के विदेश मंत्रालय और केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री Sarbananda Sonowal ने 5 अगस्त 2026 को इस बिना किसी उकसावे के किए गए हमले की तीखी आलोचना की। भारत ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर बार-बार हो रहे ऐसे हमले बेहद चिंताजनक हैं और इन पर तुरंत रोक लगनी चाहिए ताकि समुद्री व्यापार सुरक्षित रहे।
ईरान कनेक्शन और क्षेत्रीय तनाव
इस हमले के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। यमनी नेशनल रेजिस्टेंस ने दावा किया कि हूती विद्रोही ईरान के इशारों पर काम कर रहे हैं और उनके हमलों का प्रबंधन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स करते हैं। यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Abdo Majali ने पहले भी कई बार हूती हमलों को एक ईरानी परियोजना का हिस्सा बताया है। हूतियों ने खुद भी ईरान के 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' में शामिल होने और ईरान व हिजबुल्लाह के साथ सैन्य समन्वय की बात स्वीकार की है।
समुद्र में बढ़ते इन खतरों को देखते हुए, जुलाई के अंत में 14 देशों ने मिलकर एक 'सऊदी-लेड मल्टीनेशनल मैरीटाइम डिफेंस अलायंस' का गठन किया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है। इस पूरी घटना की अधिक जानकारी आधिकारिक News on Air की रिपोर्ट से ली गई है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षा का यह मुद्दा उन भारतीय प्रवासियों और नाविकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो इन रास्तों से अक्सर सफर करते हैं।