ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम (सीज़फायर) समझौते की कड़ी आलोचना की है। बर्लिन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि यह समझौता इस गलत उम्मीद पर टिका है कि ईरान की सरकार अपना व्यवहार बदल लेगी। उनका मानना है कि कूटनीति को पहले ही बहुत मौके दिए जा चुके हैं और अब इससे कोई फायदा नहीं होगा।

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Reza Pahlavi ने सीज़फायर का विरोध क्यों किया?

पहलवी ने तर्क दिया कि ईरान की सरकार को सुधारने की उम्मीद करना गलत है। उन्होंने ईरान के वार्ताकारों को एक ही मशीन के अलग-अलग चेहरे बताया जो आम लोगों का दमन करते हैं। उन्होंने खुद को ईरान के लिए एक वैकल्पिक नेता के रूप में पेश किया और मध्य पूर्व में अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने यूरोपीय देशों से अपील की कि वे ईरान में लोकतंत्र के लिए लड़ने वाले लोगों की ज्यादा से ज्यादा मदद करें।

ईरान में मानवाधिकार और इंटरनेट की क्या स्थिति है?

पहलवी ने दावा किया कि पिछले दो हफ्तों में ईरान में 19 राजनीतिक कैदियों को फाँसी दी गई और 20 अन्य को मौत की सजा सुनाई गई है। वहीं, नेटब्लॉक्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट को 55 दिन हो चुके हैं और कनेक्टिविटी सामान्य स्तर के केवल 2% तक रह गई है। बर्लिन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पहलवी पर किसी ने लाल रंग का तरल पदार्थ भी फेंका, जिसके बाद हमलावर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

अमेरिका-ईरान तनाव और जहाजों पर हमले का अपडेट

अमेरिका और ईरान 8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते के सीज़फायर पर सहमत हुए थे, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 अप्रैल को आगे बढ़ा दिया था। हालांकि, 22 अप्रैल को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर गोलीबारी की और दो को जब्त कर लिया। ईरान का कहना है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी सीज़फायर का उल्लंघन है। फिलहाल वार्ता का दूसरा दौर टल गया है क्योंकि तेहरान ने अभी तक अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि नहीं की है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.