अमेरिका के पूर्व ईरान विशेष दूत Robert Malley ने वाशिंगटन की नीतियों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका यह सोचता है कि सैन्य या आर्थिक दबाव बनाकर वह ईरान को झुका देगा, तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है। Robert Malley के अनुसार, ईरान अपने बुनियादी सिद्धांतों, जैसे यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को कभी नहीं छोड़ेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच एक तरफ शांति के लिए बातचीत चल रही है और दूसरी तरफ सैन्य टकराव भी देखने को मिला है।

Doha में बातचीत के बीच अमेरिका ने किए सैन्य हमले

25 और 26 मई 2026 को अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में सैन्य हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी, जिसमें बारूदी सुरंग बिछाने वाली नावों और मिसाइल लॉन्च साइटों को निशाना बनाया गया। यह सैन्य कार्रवाई ठीक उसी समय हुई जब ईरान के मुख्य वार्ताकार कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे थे ताकि पिछले तीन महीनों से चल रहे संघर्ष को समाप्त किया जा सके।

ट्रम्प प्रशासन और ईरान की परमाणु डील पर विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ किया है कि उनकी पहली प्राथमिकता कूटनीति है, लेकिन समझौता न होने पर वह दूसरे रास्ते अपना सकते हैं। इस बीच ऐसी खबरें आई थीं कि ईरान परमाणु समझौते के लिए अपने संवर्धित यूरेनियम का भंडार छोड़ने को तैयार हो गया है। हालांकि, ईरानी सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि बातचीत केवल चल रहे संघर्ष को रोकने पर केंद्रित है और उन्होंने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई नया वादा नहीं किया है।

पूर्व दूत Robert Malley का रुख और उनकी स्थिति

Robert Malley ने पहले भी कहा था कि वह राष्ट्रपति ट्रम्प के काम करने के तरीके से असहमत हैं, लेकिन वह ऐसे किसी भी समझौते का समर्थन करेंगे जो एक अनावश्यक युद्ध को समाप्त कर सके। गौरतलब है कि साल 2023 में Robert Malley का सुरक्षा क्लीयरेंस रद्द कर दिया गया था और संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा को लेकर फिलहाल उनके खिलाफ FBI की जांच चल रही है। सीआईए के पूर्व निदेशक Mike Pompeo और सीनेटर Ted Cruz जैसे अमेरिकी नेता भी इस समझौते को लेकर संदेह जता रहे हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Robert Malley कौन हैं और उन्होंने क्या बयान दिया है?

Robert Malley अमेरिका के पूर्व ईरान विशेष दूत हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को गलतफहमी है कि सैन्य या आर्थिक दबाव से वह ईरान को यूरेनियम संवर्धन जैसे बुनियादी अधिकारों को छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है।

दोहा में वार्ता के दौरान क्या घटना हुई थी?

जब ईरानी वार्ताकार दोहा में अमेरिका के साथ शांति समझौते के लिए बातचीत कर रहे थे, उसी दौरान अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में संदिग्ध मिसाइल साइटों पर हवाई हमले किए थे।