वेनेज़ुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेलसी रॉड्रिगेज़ ने अमेरिका द्वारा देश की तेल संपदा पर ‘अनिश्चितकालीन नियंत्रण’ स्थापित करने और उससे होने वाले मुनाफे के खर्च पर ‘निर्देश’ देने की योजना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। रॉड्रिगेज़ ने साफ शब्दों में कहा है कि वेनेज़ुएला अपने संसाधनों पर किसी भी तरह का विदेशी नियंत्रण बर्दाश्त नहीं करेगा और देश के तेल का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ वहां की जनता के हितों के लिए किया जाएगा।

ट्रम्प प्रशासन और जेडी वेंस का प्लान: 50 मिलियन बैरल तेल जब्त करने और राजस्व को ‘अमेरिकी हितों’ में खर्च करने की तैयारी

अमेरिका की नई सरकार वेनेज़ुएला के तेल भंडार को लेकर आक्रामक रणनीति अपना रही है। ट्रम्प प्रशासन ने वेनेज़ुएला के 30 से 50 मिलियन बैरल तेल को जब्त कर उसे बेचने का ऐलान किया है। इस मुद्दे पर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका तेल से होने वाली कमाई (Revenue) को पूरी तरह ‘कंट्रोल’ करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि यह पैसा ‘अमेरिका के राष्ट्रीय हितों’ के लिए ही खर्च हो। इसके अलावा, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने एक 3-चरण (3-phase) वाली योजना पेश की है। इसमें सबसे पहले स्थिति को स्थिर (stabilize) करना, फिर तेल की मार्केटिंग की निगरानी करना और अंत में सत्ता परिवर्तन (transition) शामिल है। अमेरिका ने रूसी झंडे वाले टैंकरों सहित कई तेल टैंकरों को जब्त भी कर लिया है।

डेलसी रॉड्रिगेज़ की दो टूक: ‘वेनेज़ुएला को कोई विदेशी ताकत नहीं चला सकती, व्यापार होगा तो सिर्फ आपसी फायदे की शर्त पर’

अमेरिकी दबाव के बीच डेलसी रॉड्रिगेज़ ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “वेनेज़ुएला को कोई विदेशी ताकत कंट्रोल नहीं कर रही है; हम साझेदारी करेंगे लेकिन हमारा तेल हमारे लोगों के हित में ही इस्तेमाल होगा।” हालांकि, रॉड्रिगेज़ ने कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। उन्होंने संकेत दिया है कि वह अमेरिका के साथ तेल व्यापार (Oil Trade) के लिए ‘खुली’ (Open) हैं, लेकिन यह सिर्फ ‘पारस्परिक लाभ’ (Mutual Benefit) के आधार पर ही संभव होगा। उनका यह बयान अमेरिका को स्पष्ट संदेश है कि वेनेज़ुएला अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।

मादुरो की गिरफ्तारी के बाद सत्ता में आईं डेलसी, तेल कंपनियों के लिए रही हैं भरोसेमंद ‘कॉन्टैक्ट पॉइंट’

डेलसी रॉड्रिगेज़ का बैकग्राउंड काफी मजबूत रहा है। वह निकोलास मादुरो की सरकार में उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री रह चुकी हैं। हाल ही में अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन के बाद जब मादुरो को गिरफ्तार किया गया, तो उन्होंने अंतरिम राष्ट्रपति का पद संभाला। तेल उद्योग में उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। वह चेवरॉन (Chevron) और कॉनकॉफिलिप्स (ConocoPhillips) जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों के लिए प्रमुख ‘कॉन्टैक्ट पॉइंट’ रही हैं। ये कंपनियां वेनेज़ुएला के विशाल तेल भंडार को अनलॉक करना चाहती हैं और रॉड्रिगेज़ को एक ऐसे नेता के रूप में देखती हैं जो कड़े प्रतिबंधों (Sanctions) के बीच भी तेल क्षेत्र को मैनेज करने का अनुभव रखती हैं।

वैश्विक प्रतिक्रिया और विरोध: विपक्ष ने बताया ‘भ्रष्टाचार की आर्किटेक्ट’ तो तेल कंपनियां कर रही हैं समर्थन

डेलसी रॉड्रिगेज़ को लेकर अंतरराष्ट्रीय और आंतरिक प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। एक तरफ, तेल उद्योग की दिग्गज कंपनियां जैसे रेपसोल (Repsol), ईएनआई (Eni) और चेवरॉन उन्हें प्राथमिकता देती हैं क्योंकि वह बिजनेस को समझती हैं। वहीं दूसरी तरफ, वेनेज़ुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मचाडो ने रॉड्रिगेज़ को “यातना, भ्रष्टाचार और नार्को-ट्रैफिकिंग” का मुख्य आर्किटेक्ट बताया है। भू-राजनीतिक स्तर पर रूस और चीन, जो अब तक मादुरो का समर्थन कर रहे थे, वे भी रॉड्रिगेज़ को मादुरो का ही सहयोगी मानते हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार लेकिन उत्पादन ठप, अमेरिकी नियंत्रण से बदल सकते हैं तेल के दाम

आर्थिक दृष्टिकोण से यह संघर्ष बेहद अहम है क्योंकि वेनेज़ुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार (Largest Oil Reserves) हैं। हालांकि, सालों से निवेश की कमी और कड़े प्रतिबंधों के कारण यहां तेल उत्पादन गिरकर महज 7,00,000 बैरल प्रतिदिन (bpd) रह गया है। जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल पर नियंत्रण करने में सफल होता है, तो इससे बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों पर गिरावट का दबाव (Downward Pressure) बनेगा। फिलहाल, यह तनाव अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्तों में एक नया और निर्णायक मोड़ ला रहा है।

GulfHindi Desk

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