रूस की सरकारी परमाणु कंपनी Rosatom ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट से अपने कर्मचारियों को वापस बुलाने का फैसला नहीं बदलेगी। 8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हुआ था, लेकिन इसके बावजूद रूस को वहां हालात सुरक्षित नहीं लग रहे हैं। Rosatom के प्रमुख ने बयान दिया है कि अभी अपने लोगों को वहां वापस भेजने का समय नहीं आया है।

सीजफायर के बाद भी रूस क्यों उठा रहा है यह कदम?

Rosatom के सीईओ अलेक्सी लिखाचेव ने बताया कि ईरान में स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि सीजफायर से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन यह समझौता काफी कमजोर है और कभी भी टूट सकता है। बुशहर न्यूक्लियर प्लांट में फिलहाल लगभग 128 रूसी कर्मचारी मौजूद हैं और उन्हें वहां से निकालने के लिए अगले दौर की प्लानिंग की जा रही है। अब तक 600 से ज्यादा कर्मचारी आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित निकाले जा चुके हैं।

ईरान और आसपास के इलाकों में क्या चल रहा है?

  • हिजबुल्लाह ने सीजफायर के बावजूद इजराइल पर रॉकेट हमले जारी रखे हैं।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि समझौते का पालन न होने पर बड़े हमले किए जाएंगे।
  • ईरान ने साफ किया है कि वह अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम कम नहीं करेगा।
  • बुशहर प्लांट ईरान की बिजली की जरूरतों के लिए बहुत जरूरी है, इसलिए इसे चालू रखा गया है।
  • अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना संवर्धित यूरेनियम हटाए और होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोले।

बुशहर प्लांट ईरान का इकलौता चालू न्यूक्लियर प्लांट है। रूस ने वहां दो नए यूनिट्स का काम पहले ही रोक दिया है क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव और हमले लगातार बढ़ रहे थे। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि वे जहाजों को रास्ता तभी देंगे जब अमेरिका अपनी आक्रामकता कम करेगा।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.