डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में शुक्रवार 13 मार्च 2026 को ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। रुपया अपने पिछले रिकॉर्ड स्तर 92.3575 को पार करते हुए 92.49 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल के कारण घरेलू मुद्रा पर काफी दबाव देखने को मिला है। कच्चे तेल का भाव 100 से 106 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है जिससे भारत पर आयात का खर्च बढ़ रहा है और हर महीने 7 से 8 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है।

रुपये की गिरावट का मुख्य कारण क्या है

रुपये की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल का महंगा होना है। LKP Securities के विशेषज्ञ जतिन त्रिवेदी के अनुसार कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स ने रुपये को कमजोर किया है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसे निकाले हैं। 12 मार्च को निवेशकों ने करीब 7,049 करोड़ रुपये निकाले और 2026 में अब तक 46,000 करोड़ रुपये की भारी निकासी हो चुकी है।

रिजर्व बैंक (RBI) ने क्या कदम उठाए

बाजार में रुपये की इस भारी गिरावट को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बाजार में सीधा दखल दिया है। मुद्रा विशेषज्ञ के एन डे ने बताया कि RBI का मकसद रुपये को एक खास नंबर पर रोकना नहीं बल्कि गिरने की रफ्तार को धीमा करना है। स्थिति को संभालने के लिए 13 मार्च को RBI ने ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत 50,000 करोड़ रुपये बाजार में डाले हैं। यह 1 लाख करोड़ रुपये की कुल योजना का दूसरा हिस्सा है जिससे बैंकिंग सिस्टम को राहत मिलेगी।

आम आदमी और प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा

कच्चे तेल के महंगे होने और रुपये के कमजोर होने से भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस (LPG) के दाम बढ़ सकते हैं जिससे खुदरा महंगाई बढ़ने की आशंका है। भारत का करंट अकाउंट घाटा भी बढ़ने का अनुमान है। हालांकि डॉलर के मजबूत होने से गल्फ देशों और विदेशों में काम करने वाले भारतीयों को इसका फायदा मिलेगा। जब वे अपनी विदेशी कमाई भारत भेजेंगे तो कन्वर्जन रेट के हिसाब से उनके परिवारों को पहले के मुकाबले अधिक भारतीय रुपये मिलेंगे।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.