गुरुवार को भारतीय रुपये में डॉलर के मुकाबले रिकवरी देखने को मिली है। रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर से सुधरकर 91.58 प्रति डॉलर पर आ गया है। इससे पहले बुधवार को यह 92.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है, जिसे संभालने के लिए केंद्रीय बैंक को दखल देना पड़ा है।

रुपये में गिरावट और सुधार की मुख्य वजहें

बुधवार को रुपये में भारी गिरावट देखी गई थी, जिसका मुख्य कारण ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की खबरों के बाद होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) बंद हो गई है। इस वजह से कच्चे तेल की कीमतें 82 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं। विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भी बाजार से करीब 3,200 करोड़ रुपये निकाल लिए, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा। होली की छुट्टी के बाद बाजार खुलने पर यह गिरावट ज्यादा महसूस की गई।

RBI ने कैसे रोका रुपये का गिरना?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रुपये को और गिरने से बचाने के लिए डॉलर बेचना शुरू किया। सरकारी बैंकों ने भी डॉलर की बिक्री की ताकि रुपये को 92.50 के लेवल से नीचे जाने से रोका जा सके। फॉरेक्स एडवाइजर अमित पाबारी का कहना है कि जब तक बाहरी तनाव कम नहीं होता, रुपया कमजोर रह सकता है। Yes Bank के सुदर्शन नाम्बियार ने भी माना कि सरकारी बैंकों की डॉलर बिक्री ने बड़ी गिरावट को थाम लिया है।

आज के मुख्य आंकड़े:

आज का रेट (गुरुवार) 91.58/USD
रिकॉर्ड निचला स्तर 92.31/USD
पिछला बंद भाव 92.15/USD
कच्चे तेल का भाव $82+ प्रति बैरल

आम लोगों और प्रवासियों पर इसका असर

भारत अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से खरीदता है, इसलिए रुपये के कमजोर होने से पेट्रोल और डीजल महंगा हो सकता है। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर पड़ेगा। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने भी महंगाई बढ़ने की चिंता जताई है। वहीं, खाड़ी देशों (Gulf) में काम करने वाले जो भारतीय घर पैसा भेजते हैं, उन्हें कमजोर रुपये से एक्सचेंज रेट में थोड़ा फायदा मिल सकता है, लेकिन भारत में महंगाई बढ़ने का जोखिम भी बना रहता है।