16 जनवरी 2026 को भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हल्की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में यह हलचल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की ओर से ब्याज दरों को लेकर आए सख्त बयानों के बाद देखी गई। हालांकि, भारत के व्यापार घाटे (Trade Deficit) में आ रही कमी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा समय पर किए गए उपायों ने रुपये को बहुत ज्यादा टूटने से बचा लिया है, जिससे बाजार में एक तरह का संतुलन बना हुआ है।

आज का एक्सचेंज रेट

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को डॉलर और रुपये (USD/INR) की विनिमय दर 90.34 से 90.87 के दायरे में घूमती रही। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, मिड-मार्केट रेट लगभग 90.69 रहा, जिसमें दिन भर में करीब 0.42% की बढ़त देखी गई। कारोबारी सत्र के अंत में यह दर 90.3380 पर बंद हुई, जबकि दिन का उच्चतम स्तर 90.4230 तक गया था। इसका मतलब है कि अभी 1 भारतीय रुपया लगभग 0.01102 अमेरिकी डॉलर के बराबर है।

पिछले एक हफ्ते का रुझान

रुपये की चाल पर नजर डालें तो पिछले कुछ दिनों में इसमें कमजोरी आई है। 8 जनवरी के बाद से रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 0.93% कमजोर हुआ है। 8 जनवरी को यह दर 89.90 के करीब थी, जो अब 90.38 के आसपास पहुंच गई है। इस साल अब तक सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव 14 जनवरी को देखा गया, जब डॉलर का भाव 90.53 रुपये तक पहुंच गया था। यह स्पष्ट है कि डॉलर फिलहाल रुपये पर दबाव बनाए हुए है।

रुपये की चाल: एक नजर (आंकड़े)

नीचे दी गई तालिका में पिछले कुछ दिनों के दौरान रुपये और डॉलर के बीच हुए उतार-चढ़ाव का विवरण दिया गया है:

तारीख (2026) ओपन (Open) क्लोज (Close) हाई (High) लो (Low)
16 जनवरी 90.3561 90.3380 90.4230 90.3380
15 जनवरी 90.2481 90.3555 90.4321 90.2048
14 जनवरी 90.2812 90.2481 90.5390 89.9539
8 जनवरी 89.8576 89.8683 90.1347 89.7203

गिरावट की मुख्य वजहें

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा दिए गए ‘हॉकिस’ (Hawkish) बयान हैं, जिसका मतलब है कि वे अमेरिका में ब्याज दरों को ऊंचा रख सकते हैं। इससे डॉलर को मजबूती मिलती है और रुपया कमजोर होता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत का व्यापार घाटा कम हो रहा है, जिससे रुपये को सपोर्ट मिल रहा है। इसके अलावा, आरबीआई भी लिक्विडिटी यानी नकदी प्रवाह को नियंत्रित करके रुपये की गिरावट को थामने की कोशिश कर रहा है।

भविष्य की संभावनाएं

वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के मध्य तक रुपया 90.30 से 90.38 के दायरे में स्थिर रह सकता है। साल की शुरुआत में अब तक औसत दर 90.14 के आसपास रही है। जानकारों का यह भी मानना है कि 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक स्थितियों में सुधार हो सकता है और रुपया वापस मजबूत होकर 89.39 के स्तर तक आ सकता है। फिलहाल निवेशकों को बाजार की इस अस्थिरता पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

Last Updated: 16 January 2026