रूस और चीन ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में अपनी पूरी मदद देने का ऐलान किया है। यह खबर ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। हाल ही में पाकिस्तान में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी, जिसके बाद अब दुनिया की नजरें इन बड़ी शक्तियों पर टिकी हैं।

रूस और चीन ईरान की कैसे कर रहे हैं मदद?

रूस और चीन लंबे समय से ईरान के करीबी रहे हैं और अलग-अलग तरीकों से उसकी मदद कर रहे हैं। अमेरिका की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, रूस ईरान की सेना को सैटेलाइट के जरिए खुफिया जानकारी दे रहा है। इससे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को अमेरिकी जहाजों और सैन्य ठिकानों की पहचान करने में आसानी होती है। इसके अलावा रूस ईरान को खाना और कुछ सैन्य उपकरण भी भेज रहा है।

चीन का ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ता बहुत मजबूत है। चीन अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल ईरान से खरीदता है और बदले में उसे आर्थिक और सैन्य सहायता देता है। ऐसी चर्चाएं भी हैं कि चीन ईरान की सुरक्षा बलों को सीधे तौर पर मदद दे सकता है। अब इन दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वे अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को सफल बनाने के लिए हर तरह का सहयोग करेंगे।

पाकिस्तान में हुई बातचीत क्यों रही नाकाम?

अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीद में 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान में बातचीत शुरू हुई थी। लेकिन केवल एक दिन बाद, 12 अप्रैल को यह बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए युद्ध को रोकने के लिए कोई रास्ता नहीं निकल सका। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर बात बिगड़ने का आरोप लगाया है।

बातचीत नाकाम होने की मुख्य वजहें अमेरिकी गारंटी और ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रही हैं। फिलहाल दो हफ्ते का युद्धविराम चल रहा है, लेकिन यह तय नहीं है कि इस दौरान फिर से बातचीत शुरू होगी या नहीं। अमेरिका लगातार रूस और चीन की ईरान को मिलने वाली मदद पर नजर रख रहा है और इसे रोकने की कोशिश करेगा।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.