अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए अब रूस और चीन ने आगे आकर मदद का हाथ बढ़ाया है। दोनों देशों ने साफ तौर पर कहा है कि वे इन दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने और उसे सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग करेंगे। यह खबर वैश्विक स्तर पर काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें अब इन बड़ी शक्तियों पर टिकी हैं।
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रूस और चीन की क्या है तैयारी
चीन के विदेश मंत्री Wang Yi और रूस के विदेश मंत्री Sergei Lavrov ने बीजिंग में एक अहम मुलाकात की। इस बैठक के दौरान उन्होंने अमेरिका और ईरान के विवाद को सुलझाने और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आपसी तालमेल बढ़ाने पर चर्चा की। चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने कहा कि मिडिल ईस्ट और फारस की खाड़ी के देशों की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए और चीन शांति talks में एक रचनात्मक भूमिका निभाएगा।
बातचीत की मौजूदा स्थिति क्या है
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दौर शुरू हुआ था, लेकिन 12 अप्रैल 2026 के आसपास यह बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिए हैं कि पाकिस्तान में दोबारा बातचीत शुरू हो सकती है। इससे पहले 7 अप्रैल 2026 को दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का ceasefire हुआ था, जिसे चीन ने शांति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया था।
विवाद और अन्य मुख्य बातें
- रूस ने ईरान के समृद्ध यूरेनियम स्टॉक को मैनेज करने की पेशकश की है ताकि समझौता हो सके।
- रूस और चीन ने UN सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया जो Strait of Hormuz को फिर से खोलने से जुड़ा था।
- चीन के विदेश मंत्रालय ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है जिनमें ईरान को मिलिट्री सपोर्ट देने की बात कही गई थी।
- रूस ने कहा है कि अगर Strait of Hormuz में शिपिंग प्रभावित होती है, तो वह चीन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा।
