रूस का बड़ा दावा, यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी हैं यूक्रेनी ड्रोन पार्ट्स के सबसे बड़े सप्लायर.

Praggya Singh sabal11 August 20263 min read53 viewsWorld
रूस का बड़ा दावा, यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी हैं यूक्रेनी ड्रोन पार्ट्स के सबसे बड़े सप्लायर.

मॉस्को में रूसी विदेश मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने हाल ही में दुनिया के सामने एक गंभीर बात रखी है। रूस का साफ़ तौर पर कहना है कि यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, स्वीडन और कनाडा जैसे देश यूक्रेन को मिलने वाले ड्रोन के पार्ट्स के सबसे बड़े सप्लायर बन चुके हैं। इन देशों की मदद से वहां लगातार खतरनाक हथियार पहुंच रहे हैं जिनका इस्तेमाल आम लोगों की जान लेने के लिए किया जा रहा है। रूस के मुताबिक ये सभी देश परोक्ष रूप से इस लड़ाई में और ज्यादा तेजी ला रहे हैं जिससे हालात सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

यूनाइटेड किंगडम और जर्मनी की भूमिका

रूसी विदेश मंत्रालय के एम्बेसडर-एट-लार्ज रोडियन मिरोशनिक ने रिया नोवोस्ती को दी गई जानकारी में बताया कि United Kingdom आम लोगों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले किलर ड्रोन के मुख्य पार्ट्स और यूनिट्स का सबसे एक्टिव सप्लायर है। इसके अलावा Germany भी बहुत बड़ी मात्रा में हथियार सप्लाई कर रहा है और Sweden भी इस पूरी प्रक्रिया में पूरा साथ निभा रहा है। इन देशों के अधिकारी खुद भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि वे कीव की सरकार को बिना पायलट वाले हवाई वाहन यानी अनमैन्ड एरियल व्हीकल भेज रहे हैं। रूस का मानना है कि इन्हीं हथियारों की वजह से निज़नेकाम्स्क और बेलगोरोड में कई बेकसूर नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

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निज़नेकाम्स्क में हुआ बड़ा ड्रोन हमला

बीते सोमवार को रूस के तातारस्तान रिपब्लिक के हेड रुस्तम मिन्निखानोव ने मीडिया को बताया कि उनके इलाके में एक बहुत खतरनाक ड्रोन हमला किया गया था। इस हमले में खासतौर पर इंडस्ट्रियल इलाकों के साथ-साथ आम रिहायशी जगहों को भी निशाना बनाया गया था। सामने आए लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक इस दर्दनाक हादसे में एक छोटे बच्चे समेत कुल 13 लोगों की मौत हो गई। वहीं इस हमले के बाद करीब 75 लोगों को तुरंत मेडिकल मदद दी गई जिनमें से 21 लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। इस बड़ी घटना के बाद पूरे इलाके में एक दिन का शोक घोषित किया गया है और रशियन इन्वेस्टिगेटिव कमेटी ने इस मामले में क्रिमिनल केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की है कि मारे गए लोगों में उज़्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के नागरिक भी शामिल थे।

रूस और नाटो देशों के बीच बढ़ता तनाव

रूस की सरकार का यह मानना है कि यूक्रेन को लगातार मिल रही हथियारों की सप्लाई की वजह से इस विवाद को शांत करने में भारी रुकावट आ रही है। रूस का कहना है कि इन हथियारों के जरिए नाटो देश अब इस लड़ाई में सीधे तौर पर शामिल होते जा रहे हैं। इस मामले पर बोलते हुए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पहले ही साफ कर दिया था कि यूक्रेन के लिए आने वाला हथियारों का कोई भी शिपमेंट रूसी सेना के लिए एक वैध टारगेट होगा। इस पूरी स्थिति पर अधिक जानकारी के लिए आप रिया नोवोस्ती की रिपोर्ट देख सकते हैं। रूस का यह भी कहना है कि जब तक बाहरी देशों से यूक्रेन को इस तरह की सैन्य मदद मिलती रहेगी तब तक शांति की उम्मीद करना बहुत मुश्किल होगा और आम नागरिकों को इस संघर्ष की भारी कीमत चुकानी पड़ती रहेगी।

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