रूस के एक बड़े नेता ने ईरान को लेकर बहुत बड़ी बात कही है. रूस की सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन Dmitry Medvedev ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है क्योंकि रूस लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम का समर्थन कर रहा है.

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रूस ने ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर क्या कहा?

रूस के सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन Dmitry Medvedev ने साफ़ कहा कि मॉस्को के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे लगे कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. इससे पहले रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने भी ईरान का बचाव किया था. उन्होंने कहा था कि ईरान को नागरिक कामों के लिए परमाणु ऊर्जा इस्तेमाल करने का पूरा हक है. रूस का यह भी मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई जांच में हथियारों के निर्माण का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है.

पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच क्या बात हुई?

30 अप्रैल 2026 को रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति Donald Trump से फोन पर बात की थी. इस बातचीत में पुतिन ने चेतावनी दी कि अगर इलाके में फिर से लड़ाई शुरू हुई तो इसके नतीजे बहुत बुरे होंगे. पुतिन ने यह प्रस्ताव भी रखा कि ईरान के परमाणु यूरेनियम को रूस संभाल सकता है. वहीं रूस के अधिकारी Yury Ushakov ने साफ़ किया कि ईरान की ज़मीन पर किसी भी तरह का सैन्य हमला करना बहुत खतरनाक और गलत होगा.

क्या Medvedev के बयानों में बदलाव आया है?

अगर पुराने बयानों को देखें तो Dmitry Medvedev की बातों में फर्क दिखता है. अप्रैल 2026 की शुरुआत में उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ईरान का परमाणु हथियार बताया था. इससे भी पहले जून 2025 में उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका के हमलों के बाद कुछ देश ईरान को सीधे परमाणु हथियार दे सकते हैं. लेकिन 30 अप्रैल को आई IRNA की रिपोर्ट में उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि ईरान के परमाणु हथियार खोजने का कोई सबूत नहीं है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

दमित्री मेदवेदेव ने ईरान के बारे में क्या बयान दिया?

रूस के सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन दमित्री मेदवेदेव ने कहा कि मॉस्को के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रूस का क्या स्टैंड है?

रूस का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ईरान को नागरिक उद्देश्यों के लिए परमाणु संवर्धन करने का पूरा अधिकार है और वह कूटनीतिक समाधान का समर्थन करता है.