ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते रूस ने एक बड़ा सुरक्षा कदम उठाया है. शनिवार 4 अप्रैल को रूस की सरकारी परमाणु कंपनी Rosatom ने ईरान के Bushehr न्यूक्लियर पावर प्लांट से अपने 198 कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. यह अब तक की सबसे बड़ी निकासी मानी जा रही है क्योंकि प्लांट के बिल्कुल पास में एक मिसाइल हमला हुआ था. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इस प्लांट को नुकसान पहुँचा तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ेगा.

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आखिर क्यों रूस को आनन-फानन में निकालने पड़े अपने लोग?

Rosatom के CEO Alexei Likhachev ने बताया कि Bushehr प्लांट के आसपास हालात अब बहुत गंभीर हो गए हैं और न्यूक्लियर हादसे का खतरा हर दिन बढ़ता जा रहा है. शनिवार को प्लांट के पास एक मिसाइल गिरने से एक ईरानी सुरक्षाकर्मी की मौत हो गई और एक सहायक इमारत को काफी नुकसान पहुँचा. फरवरी के आखिर से ही यहाँ हालात बिगड़ने लगे थे जब ईरान और इसराइल के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा हुई थी. अब प्लांट की देखरेख के लिए केवल 50 रूसी वॉलिंटियर्स ही वहां रुकेंगे ताकि प्लांट बंद न हो जाए.

खाड़ी देशों (GCC) के लिए क्या है बड़ी चिंता और चेतावनी?

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने एक बहुत कड़ा बयान जारी किया है जो खाड़ी देशों की नींद उड़ा सकता है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस न्यूक्लियर प्लांट पर हमले जारी रहे, तो इससे निकलने वाला रेडिएशन केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि रेडियोधर्मी कचरा सऊदी अरब, UAE और कुवैत जैसे खाड़ी देशों की राजधानियों तक पहुँच सकता है. परमाणु एजेंसी IAEA ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और कहा है कि परमाणु सुरक्षा को लेकर कोई भी लापरवाही भारी पड़ सकती है.

निकासी के चरणों और स्थिति का विवरण नीचे टेबल में दिया गया है:

तारीख अपडेट
4 अप्रैल 2026 198 रूसी कर्मचारियों की सबसे बड़ी निकासी हुई.
27 मार्च 2026 163 रूसी और अन्य देशों के नागरिक आर्मेनिया के रास्ते निकले.
11 मार्च 2026 150 रूसी स्टाफ और उनके परिवारों को निकाला गया.
फरवरी अंत 2026 ईरान और अमेरिका-इसराइल के बीच तनाव की शुरुआत हुई.