रूस ने 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। यह फैसला अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में मची उथल-पुथल को देखते हुए लिया गया है। मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है। रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार यह प्रतिबंध 31 जुलाई 2026 तक लागू रहेगा ताकि रूस के घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो और कीमतें काबू में रहें।

युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में क्या बिगड़े हालात?

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद खाड़ी देशों में स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है। इसका सीधा असर वहां रह रहे प्रवासियों और तेल के कारोबार पर पड़ा है। वर्तमान स्थिति को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • इजरायली सेना ने तेहरान में ईरानी बुनियादी ढांचे पर बड़े हवाई हमले किए हैं।
  • कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के फ्यूल टैंक पर ईरानी ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई।
  • सऊदी अरब ने अपने हवाई क्षेत्र में घुस रहे दो ड्रोन को मार गिराया है।
  • अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर निकल गई है।
  • यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर मिसाइल हमले करने का दावा किया है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने की वजह से समुद्री व्यापार पूरी तरह ठप होने की कगार पर है।

दुनिया भर के बड़े देशों ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने युद्धविराम की गुहार लगाई है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इन दावों को पूरी तरह झूठा करार दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जब तक समुद्री रास्ता पूरी तरह साफ नहीं होता, हमले जारी रह सकते हैं। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने समुद्री सुरक्षा बहाल करने के लिए 35 देशों की एक अंतरराष्ट्रीय बैठक बुलाने का ऐलान किया है ताकि व्यापारिक जहाजों का रास्ता सुरक्षित किया जा सके।

फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे देशों ने अमेरिका को अपने बेस या हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। चीन और पाकिस्तान ने इस युद्ध को समाप्त करने के लिए एक शांति योजना भी पेश की है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस युद्ध के कारण अरब क्षेत्र को करीब 194 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि उड़ानों के किराए और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने की संभावना है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.