रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने भारत का दौरा किया और प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री S. Jaishankar से मुलाकात की। इस बैठक में रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। Lavrov ने भारत की अंतरराष्ट्रीय साख की तारीफ की और दुनिया में अस्थिरता के लिए पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया।
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रूस और भारत के बीच किन अहम मुद्दों पर बात हुई?
Sergey Lavrov और भारतीय नेताओं के बीच रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष खोज और उर्वरक सहयोग पर चर्चा हुई। रूस ने भारत के साथ अपने रिश्तों को ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ (Special and Privileged Strategic Partnership) तक ले जाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। यह सारी बातचीत दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin की भारत यात्रा के दौरान हुए समझौतों पर आधारित थी। इसके अलावा दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने और ऐसे ट्रांसपोर्ट और वित्तीय रास्ते बनाने पर जोर दिया जिन पर बाहरी देशों का दबाव न हो।
तेल और ऊर्जा की सप्लाई को लेकर क्या अपडेट है?
Lavrov ने भरोसा दिलाया कि भारत को ऊर्जा की सप्लाई से जुड़े सभी समझौतों को पूरा किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि भारत की ऊर्जा मांगों को हमेशा सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है और भारत आने वाले रूसी तेल की मात्रा में बढ़ोतरी हुई है। रूस ने यह भी कहा कि बाहरी प्रतिस्पर्धा के बावजूद भारत को ऊर्जा की आपूर्ति जारी रहेगी ताकि दोनों देशों का आर्थिक सहयोग मजबूत बना रहे।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया के विवाद पर क्या रही राय?
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों को बातचीत और कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात दोहराई। दूसरी तरफ, Sergey Lavrov ने कहा कि पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप की वजह से दुनिया के कई हिस्सों में तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि तीसरे देशों के दबाव से भारत और रूस के रिश्तों को खराब करने की कोशिशें नाकाम रही हैं और भारत अपनी संप्रभुता को लेकर पूरी तरह सजग है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Sergey Lavrov ने भारत का दौरा कब किया?
Sergey Lavrov ने 13 मई से 15 मई 2026 तक भारत का दौरा किया। उन्होंने 14 और 15 मई को नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया।
रूस ने भारत के साथ किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का वादा किया है?
रूस ने रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष तकनीक, ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और उर्वरक सहयोग को बढ़ाने का वादा किया है। उन्होंने तेल की सप्लाई बढ़ाने और नए वित्तीय चैनल बनाने पर भी बात की।
