रूस और ईरान के बीच रिश्तों में एक और अहम मोड़ आया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने फोन पर लंबी बातचीत की। इस चर्चा का मुख्य मकसद मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को खत्म करना और समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाना था। रूसी विदेश मंत्रालय ने इस पूरी बातचीत की जानकारी साझा की है।
रूस और ईरान की बातचीत में किन मुख्य मुद्दों पर चर्चा हुई?
- समुद्री रास्तों की आजादी: दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आने-जाने की आजादी पर बात की।
- रूसी जहाज और कार्गो: रूस ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से रूसी जहाजों और सामान का रास्ता बिना किसी रुकावट के खुला रहना चाहिए क्योंकि यह दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए जरूरी है।
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों मंत्रियों ने गहराई से विचार-विमर्श किया।
मिडिल ईस्ट में शांति के लिए रूस का क्या प्लान है?
रूस ने साफ किया है कि वह मध्य पूर्व में चल रही दुश्मनी को पूरी तरह खत्म करना चाहता है। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, रूस इस क्षेत्र में सैन्य और राजनीतिक स्थिति को स्थिर करने के लिए तैयार है। रूस ने कहा कि वह शांति स्थापित करने के लिए चल रही मध्यस्थता कोशिशों का समर्थन करता है और कूटनीतिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग देगा।
इस फोन कॉल से पहले 27 अप्रैल 2026 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में ईरानी विदेश मंत्री अराघची से मुलाकात की थी। वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी राष्ट्रपति पुतिन को एक संदेश भेजा था। क्षेत्र में 28 फरवरी से युद्धविराम जारी है और पर्दे के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के प्रयास चल रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों की बातचीत कब हुई?
यह महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता 2 मई, 2026 को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई।
होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए रूस यहाँ से अपने जहाजों और कार्गो के अबाध मार्ग की मांग कर रहा है।