रूस के सुरक्षा परिषद के डिप्टी चेयरमैन Dmitry Medvedev ने ईरान की राजधानी तेहरान का दौरा किया। वे वहां Ayatollah Ali Khamenei के जनाजे में शामिल होने गए थे, जिनकी मौत फरवरी में हुए हवाई हमलों के दौरान हुई थी। इस यात्रा के दौरान रूस ने साफ कर दिया कि अमेरिका और इसराइल के साथ हुए युद्ध के बाद भी ईरान के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी कम नहीं होगी।

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Medvedev ने अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति Vladimir Putin की ओर से ईरान को संवेदनाएं भेजीं। उन्होंने अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ये हमले बिना किसी उकसावे के किए गए थे और ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं था।

रूस ने ईरान के साथ अपनी ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप ट्रीटी’ को पूरी तरह लागू करने और सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का वादा किया है। Medvedev ने कहा कि ईरान एक मजबूत देश है और वह अपनी आंतरिक एकता के दम पर अमेरिका जैसी ताकतों का सामना कर लेगा।

रूस के नेता ने Strait of Hormuz पर ईरान के प्रभाव को बहुत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस समुद्री रास्ते पर ईरान का नियंत्रण किसी परमाणु हथियार जैसा प्रभाव रखता है और यह दिखाता है कि तेहरान की रणनीतिक पहुंच कितनी ज्यादा है।

रूस ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (MoU) का स्वागत किया है। हालांकि, Medvedev ने आगाह किया कि प्रतिबंधों में ढील देने और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाने जैसे मुद्दों पर अंतिम समझौता होना बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इसराइल इस समझौते को खराब करने की कोशिश कर सकता है।

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने रूस के इस समर्थन के लिए शुक्रिया अदा किया। उन्होंने रूस से अपील की कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े समझौतों को और तेज़ी से पूरा किया जाए। साथ ही, दोनों देशों ने उन देशों के लिए एक साझा प्लेटफॉर्म बनाने पर चर्चा की जिन पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि वे मिलकर काम कर सकें।