Russia का बड़ा ऐलान, ईरान और इसराइल के बीच नहीं बना मध्यस्थ, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर करेगा मदद
रूस ने ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर अपनी स्थिति साफ कर दी है। क्रेमलिन ने कहा है कि वह फिलहाल इस मामले में बीच-बचाव यानी मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा रहा है। हालांकि, अगर ज़रूरत पड़ी तो रूस मदद के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
रूस ने मध्यस्थता को लेकर क्या कहा?
क्रेमलिन के प्रवक्ता Dmitry Peskov ने बताया कि रूस ने अपनी मदद का प्रस्ताव पहले भी दिया था और वह अब भी मेज़ पर है। उन्होंने साफ किया कि रूस इस समय मध्यस्थ के तौर पर काम नहीं कर रहा है, लेकिन वह स्थिति पर नज़र रखे हुए है। रूस ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है ताकि आम लोगों को नुकसान न हो और इलाके में शांति बनी रहे।
इस विवाद से जुड़ी मुख्य बातें
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| रूस की भूमिका | वर्तमान में मध्यस्थ नहीं, लेकिन मदद को तैयार |
| संपर्क | तेहरान और तेल अवीव दोनों के साथ बातचीत जारी |
| मुख्य चेतावनी | क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को खतरा |
| नेतनयाहू पर प्रतिक्रिया | शासन परिवर्तन की बात को खतरनाक बताया |
| UN प्रभाव | सुरक्षा परिषद में रूस की वीटो पावर ईरान के लिए अहम |
| परमाणु समझौता | लड़ाई की वजह से समझौते को फिर से शुरू करना मुश्किल हुआ |
विवाद का असर और अन्य देशों की राय
विशेषज्ञ Hanna Notte के अनुसार, कुछ अंतरराष्ट्रीय देशों की अनिच्छा की वजह से रूस की भूमिका इस मामले में सीमित रही है। रूस इस बात पर भी चर्चा कर रहा है कि वे कौन से कदम थे जिनसे स्थिति इतनी खराब हुई। फिलहाल रूस ने अपनी प्राथमिकता रूसी नागरिकों की सुरक्षा को बताया है और दोनों पक्षों से अपील की है कि वे ऐसे काम न करें जिससे लोगों की जान को खतरा हो।