अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे गंभीर संकट को सुलझाने के लिए अब रूस ने अपनी इच्छा जताई है। रूस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह दोनों देशों के बीच विवाद खत्म कराने में मदद करेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस मामले में स्पष्ट जानकारी साझा की है।

रूस की मदद का ऑफर और क्रेमलिन का बयान

रूस ने 20 अप्रैल 2026 को यह बात कही थी कि वह अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने के लिए सहायता देने को तैयार है। हालांकि, क्रेमलिन ने यह भी साफ किया कि वह खुद को कोई मध्यस्थ नहीं मानता है, लेकिन एक शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए मदद कर सकता है। 27 अप्रैल 2026 को रूस ने फिर से कहा कि वह दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहने का स्वागत करता है ताकि सैन्य कार्रवाई को रोका जा सके।

ईरान और अमेरिका के बीच वर्तमान स्थिति

  • बातचीत की पेशकश: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बताया कि तेहरान फिलहाल अमेरिका द्वारा चर्चा के लिए दिए गए प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।
  • डिप्लोमैटिक कोशिशें: 12 अप्रैल 2026 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से फोन पर बात की और मध्य पूर्व में शांति के लिए कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया।
  • ईरान की शर्तें: इससे पहले 2 अप्रैल को ईरान के दूत काज़ेम जलाली ने युद्धविराम के लिए चार मुख्य शर्तें रखी थीं, जिनमें हमलों को पूरी तरह रोकना, भविष्य के हमलों के खिलाफ गारंटी, नुकसान का मुआवजा और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के अधिकार का सम्मान शामिल था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

रूस ने अमेरिका और ईरान विवाद पर क्या रुख अपनाया है

रूस ने कहा है कि वह खुद को मध्यस्थ नहीं मानता लेकिन क्षेत्र में शांति बनाए रखने और आर्थिक नुकसान को रोकने के लिए दोनों देशों की मदद करने को तैयार है।

ईरान ने युद्धविराम के लिए क्या मांगें रखी हैं

ईरान ने हमलों को पूरी तरह बंद करने, भविष्य में हमलों की गारंटी, हुए नुकसान की भरपाई और होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने अधिकार का सम्मान करने की मांग की है।