रूस और ईरान के बीच एक अहम बातचीत हुई है। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने ईरान को भरोसा दिलाया है कि वे युद्ध खत्म करने और इलाके में शांति लाने में मदद करेंगे। यह चर्चा एक फोन कॉल के जरिए हुई, जिसमें तनाव कम करने और कूटनीतिक रास्तों पर बात हुई।
रूस ने ईरान की मदद के लिए क्या कहा?
रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि रूस युद्ध को रोकने और क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए पूरी मदद करने को तैयार है। रूस के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों ने सैन्य और राजनीतिक स्थिति को सुधारने पर चर्चा की। रूस ने अमेरिका से भी मांग की है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बंद करे और कड़े प्रतिबंधों की मांग छोड़ दे।
ईरान ने रूस को किन बातों की जानकारी दी?
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने रूस को क्षेत्र के हालात के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका बार-बार युद्धविराम के नियमों को तोड़ रहा है। ईरान ने अमेरिका और इसराइल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिए अपनी नई योजनाएं रूस के साथ साझा कीं। इस बातचीत में Strait of Hormuz से जहाजों के गुजरने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर भी बात हुई।
शांति कोशिशों के पीछे की बड़ी बातें क्या हैं?
- पुतिन की पहल: रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने 12 अप्रैल 2026 को ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से बात कर शांति का प्रस्ताव दिया था।
- सुरक्षा परिषद की चेतावनी: 15 अप्रैल को रूस की सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका और इसराइल शांति वार्ता की आड़ में ईरान पर जमीनी हमला कर सकते हैं।
- पाकिस्तान की भूमिका: ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में पाकिस्तान ने मध्यस्थ के तौर पर काम किया।
- पुतिन और अरघची की मुलाकात: 27 अप्रैल 2026 को राष्ट्रपति पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में ईरान के विदेश मंत्री से मिलकर द्विपक्षीय सहयोग पर बात की थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच फोन कॉल कब हुई?
यह बातचीत 2 मई 2026 को हुई, हालांकि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक यह कॉल स्थानीय समय के अनुसार 1 मई 2026 को हुई थी।
रूस ने अमेरिका से क्या मांग की है?
रूस ने अमेरिका से मांग की है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई बंद करे और दंडात्मक मांगों को छोड़ते हुए कूटनीति का रास्ता अपनाए।