दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर रूस ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है. रूस के अनुसार अगले दो हफ्तों के भीतर तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर सकती हैं. सऊदी अरब के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई इस जानकारी ने ग्लोबल मार्केट में निवेशकों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है. अगर ऐसा होता है तो खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और अन्य देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर देखने को मिल सकता है.

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तेल की कीमतों में इस भारी उछाल की वजह क्या है?

रूस के विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष की वजह से मार्केट में तेल की सप्लाई कम हो रही है. अगर यह विवाद लंबे समय तक चलता है, तो रोजाना करीब 1.5 करोड़ बैरल तेल की कमी हो सकती है. इसके अलावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने भी मार्केट में दबाव बनाया हुआ है. JPMorgan की रिपोर्ट भी संकेत दे रही है कि मई के मध्य तक कीमतें 150 डॉलर के ऊपर जा सकती हैं.

मार्केट के ताज़ा आंकड़े और एक्सपर्ट्स की राय

  • ब्रेंट क्रूड का हाल: हाल ही में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 7.78% की बढ़ोतरी देखी गई है और यह 109.03 डॉलर के करीब पहुंच गया है.
  • OPEC+ का फैसला: ओपेक देश तेल की सप्लाई को 2,06,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं.
  • रूस की कमाई: कच्चे तेल के दाम बढ़ने से रूस के बजट में लगभग 20 अरब डॉलर की अतिरिक्त कमाई होने का अनुमान है.
  • Urals क्रूड: रूस के अपने कच्चे तेल की औसत कीमत मार्च में 77 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

क्या सप्लाई बढ़ने से कम होंगे तेल के दाम?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार ओपेक प्लस आज तेल उत्पादन में मामूली बढ़ोतरी करने का फैसला ले सकता है. हालांकि जानकारों का मानना है कि जितनी सप्लाई की कमी हो रही है, उसके मुकाबले यह बढ़ोतरी काफी कम है. विशेषज्ञ अहमद समीर के अनुसार अगर जियोपॉलिटिकल तनाव दो महीने और चलता है, तो 150 डॉलर का स्तर छूना तय है. बाजार की नजरें अब खाड़ी देशों और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही तेल की भविष्य की दिशा तय करेगा.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.