रूस का साफ ऐलान, जब तक यूक्रेन को मिलता रहेगा समर्थन, यूरोपीय देशों के साथ बातचीत मुमकिन नहीं.

मॉस्को से आई एक बड़ी खबर के मुताबिक रूस ने यूरोपीय देशों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक वे यूक्रेन का समर्थन बंद नहीं करते तब तक उनके साथ किसी भी तरह की रचनात्मक बातचीत शुरू होना असंभव है। रूसी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी अलेक्जेंडर ट्रोफिमोव ने यह बात रूसी समाचार एजेंसी रिया नोवोस्ती के साथ हुई बातचीत के दौरान कही है। इस बयान के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर से तनाव बढ़ता हुआ साफ नजर आ रहा है और दोनों पक्षों के बीच दूरियां और अधिक गहरी होती जा रही हैं।
पश्चिमी देशों पर लगाए गंभीर आरोप
अलेक्जेंडर ट्रोफिमोव ने बातचीत के दौरान पश्चिमी देशों पर रूस के खिलाफ लगातार आक्रामक और पूरी तरह से अनुचित कदम उठाने का बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम का मुख्य और एकमात्र उद्देश्य केवल रूस को रणनीतिक रूप से हार देना है। उनके अनुसार यूरोपीय देशों का इस समय केवल एक ही लक्ष्य बचा है और वह है कीव सरकार की मदद करना, रूस पर लगातार सैन्य दबाव बनाए रखना और इस पूरे दौर में अपनी खुद की सैन्य-औद्योगिक क्षमता को और अधिक मजबूत करना। रूसी राजनयिक का मानना है कि जब तक यूरोप का यह रवैया और रुख कायम रहेगा तब तक किसी भी सकारात्मक या रचनात्मक मुद्दे पर आपसी सहमति बना पाना बेहद मुश्किल काम होगा।
यूरेशिया में सुरक्षा ढांचा विकसित करने की तैयारी
एक तरफ जहां पश्चिमी देशों के साथ रूस के रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मॉस्को अब दूसरे विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है। रूसी राजनयिक ने स्पष्ट किया कि मॉस्को के पास पश्चिमी यूरेशिया के बाहर भी दुनिया भर में कई अन्य भरोसेमंद सहयोगी और साझेदार देश मौजूद हैं। रूस अब उन सभी देशों के साथ मिलकर पूरी समानता और अविभाज्यता के बुनियादी सिद्धांतों के आधार पर यूरेशिया क्षेत्र में एक नया और व्यापक सुरक्षा ढांचा विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
लंबी खींचतान के बीच आया नया बयान
अलेक्जेंडर ट्रोफिमोव का यह तीखा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब रूस और यूरोपीय देशों के बीच लंबे समय से यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारी मतभेद चल रहे हैं। रूस लगातार पश्चिमी देशों की तरफ से दी जा रही सैन्य और राजनीतिक मदद की खुले तौर पर आलोचना करता आया है। दूसरी तरफ यूरोपीय देश यूक्रेन को दिए जा रहे समर्थन को उसकी अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी बताते हैं। इस ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोई गुंजाइश दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।