अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत का खुलकर समर्थन किया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergei Lavrov) ने कहा है कि दोनों देशों के बीच किसी भी समझौते में ईरान और उसके पड़ोसी देशों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई के नतीजों की जिम्मेदारी अमेरिका की होगी। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि वह समझौते के लिए ईरान के सुप्रीम लीडर से मिलने के लिए तैयार हैं।

रूस ने ईरान और अमेरिका की बातचीत पर क्या कहा?

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (St. Petersburg International Economic Forum) के दौरान दिए एक इंटरव्यू में कई अहम बातें साझा की हैं। लावरोव ने साफ किया कि रूस दोनों देशों के बीच बातचीत का समर्थन करता है क्योंकि क्षेत्रीय हितों का सम्मान करने और सैन्य तरीकों को बाहर रखने के लिए बातचीत ही एकमात्र जरिया है।

  • परमाणु कार्यक्रम का समर्थन: लावरोव ने कहा कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है और उसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम समृद्ध करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने याद दिलाया कि आईएईए (IAEA) ने भी हमेशा पुष्टि की है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम सैन्य उद्देश्यों की ओर नहीं बढ़ रहा है।
  • नया सुरक्षा प्लान: रूस ने फारस की खाड़ी के लिए एक नया सुरक्षा प्लान तैयार किया है, जिसे खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह देशों और ईरान को भेज दिया गया है।
  • मध्यस्थ देशों की भूमिका: इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देश भी अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया बड़ा बयान

दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत से कोई ठोस डील निकलती है, तो वह ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) से मुलाकात करने के लिए तैयार हैं। ट्रंप ने कहा कि बातचीत बहुत अच्छी दिशा में बढ़ रही है और ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की बात मानकर एक बड़ी रियायत दी है।

इस बीच संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी जारी की है कि इस संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में लाखों लोग भूख की कगार पर पहुंच रहे हैं। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कुवैत के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की है।

लेबनान और हिजबुल्लाह का रुख

इस पूरे मामले में हिजबुल्लाह और ईरानी नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे लेबनान में तब तक किसी भी युद्धविराम को स्वीकार नहीं करेंगे जब तक कि उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। वे इस मुद्दे को बातचीत में एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। इसके बावजूद रूस ने ईरान को परमाणु समझौते के तहत समृद्ध यूरेनियम को अपने पास सुरक्षित रखने की पेशकश की है जैसा कि साल 2015 के समझौते में किया गया था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या रूस ईरान के परमाणु कार्यक्रम का समर्थन करता है?

हां, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्पष्ट किया कि ईरान को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम समृद्ध करने का पूरा अधिकार है और आईएईए (IAEA) ने भी इसकी पुष्टि की है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बारे में क्या कहा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में जा रही है और यदि कोई समझौता होता है तो वह ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से मुलाकात करने के लिए तैयार हैं।