रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने हाल ही में ईरान की ताकतवर ‘मॉस्किटो फ्लीट’ से प्रभावित होकर अपनी नौसेना के लिए भी ऐसी ही तैयारी करने का निर्देश दिया है। यह फैसला St. Petersburg में नेवी डे के मौके पर हुई चर्चा के बाद सामने आया है। पुतिन ने रूस की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से यह बड़ा कदम उठाया है।
ईरान की मॉस्किटो फ्लीट की खासियत
ईरान की इस फ्लीट में 1,500 से अधिक छोटी और बेहद तेज रफ्तार वाली हमलावर नावें शामिल हैं। इन नावों का वजन 10 टन से भी कम है और ये 100 नॉट से ज्यादा की गति से चल सकती हैं। ये नावें बंदूक, रॉकेट, एंटी-शिप मिसाइल और समुद्री बारूदी सुरंगों से लैस होती हैं। अपनी इसी तकनीक की मदद से ये बड़े नौसैनिक बेड़ों को उलझाने और भ्रमित करने का काम करती हैं, जो खास तौर पर Strait of Hormuz जैसे व्यस्त समुद्री रास्तों पर तैनात रहती हैं।
रूसी नौसेना का आधुनिकीकरण
नेवी डे के अपने संबोधन में राष्ट्रपति पुतिन ने रूसी मर्चेंट फ्लीट की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने नौसेना को आदेश दिया है कि वे रूसी जहाजों पर होने वाले किसी भी हमले का सख्ती से जवाब दें, जिसे उन्होंने समुद्री डकैती रोकने जैसा बताया। साथ ही, उन्होंने रूसी बेड़े में नई मिसाइल प्रणालियों को शामिल करने की बात दोहराई। पुतिन ने विशेष रूप से Zircon हाइपरसोनिक मिसाइल का जिक्र किया, जो रूस की सुरक्षा ताकत का एक बड़ा हिस्सा है और इसे दुनिया के बहुत कम देशों के पास होने का दावा किया गया है।
