भारत के विदेश मंत्री S Jaishankar सूरीनाम के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने Mariënburg में ‘Monument for the Fallen Heroes’ पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। यह स्मारक उन लोगों की याद में बनाया गया है जिन्होंने 1902 के विद्रोह के समय अपनी जान गंवाई थी।
गिरमिटिया मजदूरों का संघर्ष और 1902 का विद्रोह
विदेश मंत्री S Jaishankar ने बताया कि 1902 में Marienburg प्लांटेशन पर मजदूरों ने उपनिवेशवाद के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने गिरमिटिया समुदाय के साहस और उनकी गरिमा के लिए किए गए संघर्ष को याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इन लोगों का बलिदान उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष में एक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत में लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, वैसे ही गिरमिटिया मजदूरों ने विदेशों में अपनी गरिमा और आजादी के लिए संघर्ष किया।
भारत और सूरीनाम के रिश्तों को मजबूती
श्रद्धांजलि देने के अलावा विदेश मंत्री ने Paramaribo में 9वीं Joint Commission Meeting (JCM) में हिस्सा लिया। इस बैठक में उन्होंने सूरीनाम के विदेश मंत्री Melvin Bouva के साथ चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी रिश्तों को और गहरा करने पर बात हुई। विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता और न्याय की इस वैश्विक कहानी को बार-बार दोहराया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे सीख सकें।
तीन देशों का अहम दौरा
S Jaishankar 2 मई से 10 मई तक तीन देशों की यात्रा पर हैं, जिसमें जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो शामिल हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की विरासत को सम्मान देना और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
विदेश मंत्री एस जयशंकर सूरीनाम में किस स्मारक पर गए थे
वह Mariënburg में ‘Monument for the Fallen Heroes’ गए थे, जहाँ उन्होंने 1902 के विद्रोह में जान गंवाने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
गिरमिटिया (Girmitya) समुदाय कौन थे
गिरमिटिया उन भारतीय मजदूरों को कहा जाता था जिन्हें अनुबंध के तहत विदेशों में काम करने के लिए ले जाया गया था और जिन्होंने वहां अपनी गरिमा और अधिकारों के लिए संघर्ष किया।